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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने अयोध्या में उत्तर प्रदेश आवास एवं विकास परिषद की विभिन्न योजनाओं के लिए की जा रही भूमि अधिग्रहण की कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगा दी है। यह रोक बुधवार को विभिन्न याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए लगाई गई। न्यायालय ने सभी पक्षकारों को मौके पर यथास्थिति बनाए रखने का निर्देश दिया है। न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने बुधवार को 11 याचिकाओं पर एक साथ सुनवाई करते हुए यह आदेश पारित किया। न्यायालय ने कहा कि जिन योजनाओं से संबंधित भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को चुनौती दी गई है, उन सभी मामलों में राज्य सरकार सहित सभी पक्षकार यथास्थिति बनाए रखेंगे। मामले की सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी। बुधवार को विभिन्न याचियों के अधिवक्ताओं ने अपनी बहस पूरी की। उन्होंने न्यायालय को बताया कि आवास विकास परिषद अधिनियम, 1965 के तहत भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है, जिसमें 1894 के भूमि अधिग्रहण अधिनियम के प्रावधानों का उल्लेख है। हालांकि, याचियों ने तर्क दिया कि भूमि अधिग्रहण अधिनियम 2013 अब लागू है, जो भू-स्वामियों के लिए अधिक लाभकारी है। याचियों ने बताया कि 2013 के अधिनियम में पुनर्वास, पुनर्स्थापन और सामाजिक प्रभाव आकलन जैसे महत्वपूर्ण प्रावधान शामिल हैं, जो भू-स्वामियों को अधिक लाभ प्रदान करते हैं। उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के एक आदेश का भी हवाला दिया, जिसमें कहा गया है कि यदि अधिग्रहण के समय भू-स्वामी को किसी अन्य प्रावधान के अनुसार अधिक लाभ मिल रहा हो, तो उसी प्रावधान के अनुसार उसकी भूमि अधिग्रहीत की जानी चाहिए। राज्य सरकार और अन्य विपक्षी पक्षकारों की ओर से अगले दिन बहस करने का आग्रह किया गया, जिसे न्यायालय ने स्वीकार कर लिया। न्यायालय ने यह भी कहा कि यदि सरकार या आवास विकास की ओर से कोई अधिवक्ता बहस नहीं करता है, तो उन्हें लिखित बहस दाखिल करने की अनुमति दी जाएगी।
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अयोध्या भूमि अधिग्रहण पर हाईकोर्ट ने लगाई रोक:भू-स्वामियों को कम लाभ देने पर परिषद की कार्रवाई अनुचित