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वाराणसी पहुंचे केन्द्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता राज्यमंत्री रामदास आठवले ने काक्रोच पार्टी और कई संस्थाओं द्वारा धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगे जाने पर बड़ी बात कही। उन्होंने पहले इस मांग को ठुकरा दिया और कहा धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं है। उन्होंने कहा ये जो मांग की जा रही है ये बेबुनियाद है। सरकार पेपर लीक करने वालों को खिलाफ सख्त प्रावधान करने जा रही है और जो भी लोग इस लीक में शमील थे उन्हें सख्त सजा दी जाएगी। वहीं उन्होंने असदुद्दीन ओवैसी के बुकर ववाले सवाल पर ही कड़ा प्रहार किया। उन्होंने कहा कि उन्होंने जो कहा बुर्के वाला प्रधानमंत्री बन जाएगा तो राजनीती से हटकर ये बयान है। ये सिर्फ हवा-हवाई और काल्पनिक दावे हैं। धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देने की आवश्यकता नहीं हाल ही में छात्रों के भविष्य से जुड़े सबसे गंभीर मुद्दे यानी प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक होने की घटना पर विपक्ष द्वारा शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग की जा रही है। इस सवाल और बहस पर पूर्ण विराम लगाते हुए केंद्रीय मंत्री ने कहा – शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देने की कोई आवश्यकता नहीं है। उन्होंने देश के युवाओं और छात्रों को भरोसा दिलाया कि इस पेपर लीक घोटाले (पेपर फुटी) के पीछे जो भी ‘मास्टरमाइंड’ या गिरोह शामिल है। हमारी सरकार उनके खिलाफ बेहद गंभीर है और उन्हें ढूंढकर कठोर से कठोर सजा दी जाएगी। साथ ही उन्होंने मंत्रालय को निर्देश दिया कि भविष्य में ऐसी किसी भी चूक को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जाएं। राहुल गांधी फैला रहे हैं संविधान खतरे में हैं का भ्रम लोकसभा चुनाव के दौरान विपक्ष द्वारा चलाए गए संविधान बचाओ आंदोलन पर कड़ा प्रहार करते हुए अठावले ने कहा कि राहुल गांधी अक्सर जनता के सामने संविधान की किताब तो लहराते हैं। लेकिन उसकी मूल और मुख्य बातों को बताना भूल जाते हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि विपक्ष ने संविधान बदल दिया जाएगा जैसा भ्रामक और नकारात्मक प्रचार करके चुनाव में कुछ राजनीतिक लाभ (सीटें बढ़ाकर) तो हासिल कर लिया। लेकिन वे सरकार बनाने के आंकड़े से बहुत दूर रह गए। उन्होंने साफ किया कि आज भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) देश की सबसे बड़ी और ताकतवर राजनीतिक शक्ति है और पीएम मोदी का नेतृत्व पूरी तरह सुरक्षित और मजबूत है। नरेंद्र मोदी को बदलना बच्चों का खेल नहीं है। प्रधानमंत्री की बातों का किया समर्थन पीएम के भारत बुद्ध का देश है का केंद्रीय मंत्री रामदास आठवले ने समर्थन किया। उन्होंने कहा भारत हइशा से शांतिप्रिय देश है। उन्होंने कहा कि भले ही इस विषय पर विभिन्न लोगों और विचारकों की राय अलग-अलग हो सकती है।लेकिन व्यक्तिगत तौर पर और सरकार के स्तर पर हम हमेशा युद्ध के बजाय बुद्ध (शांति) के मार्ग का समर्थन करते हैं। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी के बयान का हवाला देते हुए उन्होंने दोहराया कि हमें युद्ध नहीं, बुद्ध चाहिए। इतिहास का उदाहरण देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि सम्राट अशोक ने भी कलिंग युद्ध के भारी रक्तपात के बाद अंततः शांति और बौद्ध धर्म की राह चुनी थी, क्योंकि हिंसा से केवल नुकसान ही होता है। ओवैसी के बयान पर किया पलटवार इस दौरान असदुद्दीन ओवैसी के बयान – भारत का संविधान ज्यादा समावेशी है। बाबा साहेब अंबेडकर के संविधान के अनुसार, भारत का कोई भी नागरिक देश का प्रधानमंत्री बन सकता है। भविष्य में हिजाब पहनने वाली बेटी इस देश की प्रधानमंत्री बनेगी। मेरी ऐसी इच्छा है। पर रामदास आठवले ने कहा – ओवैसी जी मेरे अच्छे मित्र हैं। और लोकतंत्र में हर किसी को अपनी राय रखने का अधिकार है। लेकिन उन्होंने एक गंभीर राजनीतिक वास्तविकता की ओर इशारा करते हुए कहा कि कोई भी वर्ग या समुदाय (चाहे वह मुस्लिम समाज हो या दलित समाज) किसी एक नेता या पार्टी का बंधुआ वोट बैंक नहीं है। वोट हमेशा विकास और न्याय के आधार पर विभाजित होते हैं। इसलिए बिना जमीनी स्तर पर काम किए और बिना देश का विश्वास जीते ऐसे हवाई दावे करना केवल काल्पनिक बातें हैं। क्योंकि भारत में मुसलामानों का इतना वोट नहीं है।
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कॉकरोच पार्टी की मांग वाराणसी में केंद्रीय मंत्री ने ठुकराई:रामदास आठवले बोले- NEET लीक के दोषियों को मिलेगी सजा, राहुल गांधी सिर्फ संविधान दिखाते हैं, बताते नहीं