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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने केंद्र और राज्य सरकार को दो बाल गृहों को वर्ष 2023-24 से लंबित गैर-आवर्ती अनुदान छह सप्ताह के भीतर जारी करने का निर्देश दिया है। न्यायालय ने टिप्पणी की कि यदि धनराशि समय पर मिलती तो बाल गृह उसका उपयोग बच्चों के हित में कर सकते थे। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन राय और न्यायमूर्ति जसप्रीत सिंह की पीठ ने अनूप गुप्ता द्वारा दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। याचिका में विशेष देखभाल की आवश्यकता वाले बच्चों के लिए काम कर रहे गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) द्वारा संचालित बाल गृहों को समय पर अनुदान दिलाने की मांग की गई है। सुनवाई के दौरान न्यायालय को बताया गया कि अधिकांश बाल गृहों को अनुदान मिल चुका है, लेकिन ग्रामीण विकास समिति, चारू गोंडा और राजसी डेवलपमेंट एंड रिसर्च संस्थान का अनुदान वर्ष 2023-24 से लंबित है। न्यायालय ने राज्य और केंद्र सरकार से यह भी कहा कि भुगतान में देरी के कारण दोनों बाल गृहों को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति पर विचार किया जा सकता है। न्यायालय ने दोनों सरकारों को आपसी सहयोग से छह सप्ताह में लंबित अनुदान जारी करने और इस प्रक्रिया को सरल बनाने का भी निर्देश दिया। साथ ही, यह सुझाव भी दिया कि अनुदान दो से अधिक किस्तों में जारी न किया जाए। इस मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर को निर्धारित की गई है।
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हाईकोर्ट ने बाल गृहों के लंबित अनुदान पर दिया आदेश:केंद्र-राज्य सरकार को छह सप्ताह में भुगतान का निर्देश, 2023-24 से लंबित