KGMU कुलपति डॉ. सोनिया नित्यानंद की मौजूदगी में औपचारिक शुभारंभ हुआ।
KGMU में सोमवार को जन्मजात और आनुवंशिक बीमारियों की समय रहते पहचान और रोकथाम की दिशा में अहम कदम उठाया गया है। पैथोलॉजी विभाग में भारत सरकार के जैव प्रौद्योगिकी विभाग (डीबीटी) निदान केंद्र, नवीनीकृत स्नातक व स्नातकोत्तर प्रयोगशाला का शुभारंभ हुआ। कुल
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डीबीटी निदान परियोजना की प्रमुख डॉ.मिली जैन ने कहा कि डीबीटी की उम्मीद योजना के तहत यह केंद्र स्थापित किया गया है। इसका मकसद गर्भावस्था और जन्म के बाद बच्चों में होने वाली गंभीर आनुवंशिक एवं जन्मजात बीमारियों की प्रारंभिक अवस्था में पहचान करना है।

गंभीर मरीजों के लिए ये बड़ी राहत है।
इन जांच की मिलेगी सुविधा
डॉ.मिली जैन ने बताया कि केंद्र में गर्भावस्था के शुरुआती तीन महीनों में गर्भवती महिला और उसके पति की थैलेसीमिया जांच की जाएगी। जांच से गर्भ में पल रहे शिशु की विशेष जांच कर बीमारी के जोखिम का आकलन किया जाएगा। निदान केंद्र में जन्म के तीसरे से पांचवें दिन नवजात शिशु की एड़ी से खून का नमूना लेकर चार प्रमुख जन्मजात बीमारियों की जांच की जाएगी। इनमें जी-6-पीडी की कमी, जन्मजात हाइपोथायरॉयडिज्म, गैलेक्टोसीमिया और जन्मजात एड्रिनल हाइपरप्लासिया शामिल हैं। केंद्र पर सभी जांचें मुफ्त होंगी।