KGMU में रविवार को घटना के बाद ट्रॉमा सेंटर में जमकर बवाल हुआ था।
KGMU में ठेका व्यवस्था की लापरवाही ने राहुल गौतम की जान ले ली। आरोप है कि फायर सेफ्टी का काम देखने वाली कंपनी को ही जलापूर्ति व्यवस्था के अनुरक्षण की जिम्मेदारी भी सौंप दी गई। कंपनी एक ही कर्मचारी से अलग-अलग तरह के काम करा रही थी। नतीजा यह हुआ कि कर्
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दुबग्गा के लीला खेड़ा निवासी राहुल गौतम मेसर्स गोविंद फायर सर्विसेस का कर्मचारी था। ये कम्पनी केजीएमयू में फायर सेफ्टी के साथ जलापूर्ति व्यवस्था के अनुरक्षण का भी काम करती है। एक ही कंपनी को दो या इससे अधिक ठेके रेवड़ी की तरह बांटे जा रहे हैं। मोटी कमाई के लालच में कंपनियां एक ही कर्मचारियों से दोनों प्रकार के ठेके का ज्यादातर काम कर रही है।

राहुल वर्मा की फाइल फोटो।
200 से ज्यादा पानी की टंकी
राहुल की मौत ने गोविंद फायर सर्विसेस की कार्यशैली की पोल खोल दी है। KGMU में छोटी-बड़ी करीब 200 से ज्यादा पानी की टंकियां हैं। इनकी सफाई और रखरखाव जैसे कामों के लिए आउटसोर्स कर्मचारियों को लगाया जाता है। आरोप है कि कई बार कर्मचारियों को बिना सेफ्टी किट और जरूरी सुरक्षा उपकरणों के टंकी सफाई जैसे जोखिम भरे कामों में उतारा जा रहा था।
गोविंद फायर सर्विस में तैनात कर्मचारी राहुल गौतम भी इसी अव्यवस्था की भेंट चढ़ गया। बताया जा रहा है कि राहुल से कंपनी के मूल काम के अलावा दूसरे कार्य भी कराए जा रहे थे। काम के दबाव और जिम्मेदारियों के बोझ के बीच उसकी जान चली गई। घटना ने KGMU में आउटसोर्स कर्मचारियों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।
एक कंपनी को मिले कई टेंडर
KGMU में एक ही कंपनी को कई-कई ठेके दिए जाने की व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं। इससे कंपनियां कर्मचारियों की संख्या बढ़ाने के बजाय मौजूद कर्मचारियों से कई तरह के काम कराने लगी हैं। अस्पताल जैसे संवेदनशील स्थान पर फायर सेफ्टी, जलापूर्ति और तकनीकी कार्यों के लिए अलग-अलग प्रशिक्षित कर्मचारियों की जरूरत होती है। अब सवाल यह है कि मरीजों की सुरक्षा का दावा करने वाले संस्थान में कर्मचारियों की सुरक्षा से समझौता क्यों किया जा रहा था?