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लखनऊ में करीब तीन दशक से फाइलों में अटकी हैदर कैनाल एलिवेटेड रोड परियोजना अब जमीन पर उतरती दिख रही है। सबसे बड़ी राहत यह है कि सड़क निर्माण के लिए कैनाल किनारे की पूरी आबादी नहीं हटाई जाएगी। नई योजना के तहत केवल उन्हीं स्थानों पर विस्थापन होगा जहां एलिवेटेड रोड के पिलर बनाए जाएंगे। लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) मोहान रोड से कालीदास मार्ग (सीएम आवास) तक करीब 11 किलोमीटर लंबी फोरलेन एलिवेटेड रोड बनाने की तैयारी कर रहा है। परियोजना पूरी होने के बाद शहर की भीड़भाड़ वाली सड़कों का दबाव कम होगा और करीब 10 लाख से अधिक लोगों को सीधा लाभ मिलेगा। पहले प्रस्ताव में कैनाल किनारे बसे बड़े हिस्से को हटाकर कमर्शियल हब विकसित करने की योजना थी। इसके चलते करीब 10 हजार से अधिक लोगों के विस्थापन का मुद्दा सामने आया था और विरोध भी शुरू हो गया था। यही वजह रही कि वर्षों तक परियोजना आगे नहीं बढ़ सकी। अब एलडीए ने योजना में बड़ा बदलाव किया है। कमर्शियल हब का प्रस्ताव फिलहाल अलग रख दिया गया है। इसके बजाय सड़क को पिलर आधारित संरचना पर विकसित किया जाएगा, जिससे बड़े पैमाने पर विस्थापन की जरूरत नहीं पड़ेगी। जिन परिवारों को निर्माण कार्य के कारण हटाना पड़ेगा, उन्हें एलडीए की ओर से आवास उपलब्ध कराया जाएगा। इसके लिए परियोजना लागत में अलग से बजट का प्रावधान किया जा रहा है। वरुण विहार को मिलेगा सीधा फायदा एलडीए की आगरा एक्सप्रेस-वे के पास विकसित की जा रही महत्वाकांक्षी वरुण विहार आवासीय योजना को मुख्य शहर से जोड़ने के लिए इस परियोजना को महत्वपूर्ण माना जा रहा है। एलिवेटेड रोड बनने के बाद हजरतगंज से वरुण विहार की दूरी महज 20 मिनट में तय की जा सकेगी, जबकि वर्तमान में इसमें 45 से 50 मिनट तक लग जाते हैं। विशेषज्ञ कंपनी का होगा चयन एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने बताया कि परियोजना को इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि सड़क भी बन जाए और न्यूनतम लोगों को विस्थापित करना पड़े। विशेष परिस्थितियों में जिन लोगों को हटाया जाएगा, उन्हें आवास उपलब्ध कराया जाएगा। परियोजना के लिए एक्सप्रेशन ऑफ इंटरेस्ट (ईओआई) जारी कर दिया गया है, ताकि इस क्षेत्र में विशेषज्ञ कंपनियों का चयन किया जा सके।
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लखनऊ में हैदर कैनाल पर एलिवेटेड रोड का रास्ता साफ,:अब सिर्फ पिलर वाली जगहों से होगा विस्थापन: 10 लाख से ज्यादा आबादी को मिलेगा फायदा