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सिद्धार्थनगर जिले में पिछले चार दिनों से रुक-रुक कर हो रही बारिश ने धान की फसल को नई ऊर्जा दी है। खेतों में पर्याप्त पानी भरने से किसानों ने राहत की सांस ली है और फसल की बढ़वार तेज होने लगी है। हालांकि, इस मानसून सीजन में अब तक जिले में पिछले वर्ष की तुलना में 148 मिमी कम बारिश दर्ज की गई है, जिससे आगे की बारिश पर किसानों की उम्मीदें टिकी हुई हैं। ड्रेनेज खंड के आंकड़ों के अनुसार, इस मानसून सीजन में अब तक जिले में करीब 320 मिमी बारिश दर्ज की गई है, जबकि पिछले वर्ष इसी अवधि तक 468 मिमी वर्षा हुई थी। यानी इस बार अब तक 148 मिमी कम बारिश हुई है। कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की फसल के लिए लगातार मूसलाधार बारिश की अपेक्षा रुक-रुक कर होने वाली मध्यम बारिश अधिक लाभदायक होती है। इससे खेतों में नमी बनी रहती है और जलभराव की समस्या भी नहीं होती। बादल और धूप के बीच सुहावना रहा मौसम गुरुवार सुबह जिले में मौसम बदला-बदला नजर आया। आसमान में घने बादल छाए रहे और बीच-बीच में धूप भी निकलती रही। मौसम विशेषज्ञों के मुताबिक, सक्रिय मानसून के दौरान यह सामान्य स्थिति है। तापमान नियंत्रित रहने से खेतों की नमी बरकरार है, जिससे फसलों को लाभ मिल रहा है। धान के खेत लबालब, खेती के काम में जुटे किसान जिले के अधिकांश ग्रामीण इलाकों में धान के खेत पानी से भर चुके हैं। किसान अब यूरिया की पहली खुराक देने और निराई-गुड़ाई जैसे कृषि कार्यों में जुट गए हैं। पर्याप्त नमी मिलने से पौधों की जड़ें मजबूत हो रही हैं और कल्ले तेजी से विकसित हो रहे हैं। कृषि विभाग के अनुसार, यदि अगस्त के शेष दिनों में भी इसी प्रकार समय-समय पर बारिश होती रही तो इस वर्ष धान की पैदावार में अच्छी बढ़ोतरी की संभावना है। सभी प्रमुख नदियां खतरे के निशान से नीचे ड्रेनेज खंड की 6 अगस्त की गेज रिपोर्ट के अनुसार जिले की सभी प्रमुख नदियां फिलहाल खतरे के निशान से काफी नीचे बह रही हैं। बाणगंगा नदी खतरे के निशान से करीब 4.12 मीटर नीचे बह रही है। राप्ती नदी (बांसी पुल) करीब 3.43 मीटर नीचे दर्ज की गई। परसोहन घाट, मुहंचोरवा घाट, ककरही पुल, आलमनगर, उस्का रेलवे पुल, लोटन पुल, तेलार नाला और नौगढ़ पुल सहित सभी गेज स्टेशनों पर जलस्तर सामान्य है। सिंचाई विभाग लगातार सभी गेज स्टेशनों की निगरानी कर रहा है और फिलहाल जिले में कहीं भी बाढ़ जैसी स्थिति नहीं है। अगले 4-5 दिन बारिश के आसार मौसम विभाग के अनुसार पूर्वी उत्तर प्रदेश में मानसून सक्रिय बना हुआ है। अगले चार से पांच दिनों तक जिले में हल्की से मध्यम बारिश और कुछ स्थानों पर तेज बारिश होने की संभावना है। नेपाल के तराई क्षेत्रों में हो रही लगातार बारिश का असर नदियों के जलस्तर पर पड़ सकता है। इसी वजह से प्रशासन और सिंचाई विभाग सतर्कता बनाए हुए हैं। किसानों को अच्छी पैदावार की उम्मीद किसान कमलेश सिंह का कहना है कि मौजूदा बारिश धान की फसल के लिए बेहद लाभकारी रही है। इससे पौधों की जड़ें मजबूत हुई हैं और कल्ले तेजी से निकल रहे हैं। यदि आगे भी इसी तरह बारिश होती रही तो उत्पादन बेहतर होगा। किसान अंकित सिंह का कहना है कि भले ही इस बार बारिश पिछले वर्ष से कम हुई है, लेकिन रुक-रुक कर हुई वर्षा ने खेतों में पर्याप्त नमी बनाए रखी है और फसल की बढ़वार अच्छी है। वहीं किसान रामू यादव का कहना है कि अगस्त का महीना धान की खेती के लिए सबसे महत्वपूर्ण होता है। यदि इस दौरान समय-समय पर बारिश होती रही तो पैदावार अच्छी होगी, लेकिन बारिश रुकने पर सिंचाई का खर्च बढ़ेगा और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। विशेषज्ञ बोले- मध्यम बारिश धान के लिए सबसे बेहतर कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि धान की अच्छी पैदावार के लिए लगातार तेज बारिश की अपेक्षा मध्यम और अंतराल वाली वर्षा अधिक उपयोगी होती है। इससे खेतों में संतुलित नमी बनी रहती है, जड़ों का विकास बेहतर होता है और पौधों में अधिक कल्ले निकलते हैं। फिलहाल सक्रिय मानसून ने किसानों को राहत दी है। अब पूरे जिले की निगाहें अगस्त के शेष दिनों की बारिश पर टिकी हैं, क्योंकि आगे होने वाली वर्षा ही इस वर्ष की धान की पैदावार और किसानों की आय की दिशा तय करेगी।
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चार दिन की बारिश से धान के खेत लबालब:सिद्धार्थनगर में पिछले साल से 148 मिमी कम बरसा मानसून, नदियां अभी खतरे से दूर