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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने सुल्तानपुर जिले में सरकारी जमीनों पर कथित अवैध कब्जे के एक मामले में कड़ी टिप्पणी की है। न्यायालय ने कहा कि याची (याचिकाकर्ता) सरकारी जमीनों पर अवैध कब्जा करने वाला व्यक्ति प्रतीत होता है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याची और उसके भाइयों द्वारा कथित फर्जी पट्टों के आधार पर कब्जाई गई सभी जमीनों का विवरण पेश किया जाए और उन्हें बेदखल करने की कार्रवाई सुनिश्चित की जाए। यह आदेश न्यायमूर्ति पंकज भाटिया की एकलपीठ ने केशव प्रसाद की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। न्यायालय ने कहा कि याचिका में लगाए गए तथ्यों से स्पष्ट है कि याची ने अकेले ही ग्राम जमखुरी, जिला सुल्तानपुर में प्रदेश सरकार की योजनाओं को प्रभावित करने का कार्य किया है। पहले खारिज की जा चुकी है याचिका सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से उपस्थित स्थाई अधिवक्ता डॉ. कृष्णा सिंह ने न्यायालय को बताया कि याची पहले भी कई मामलों में न्यायालय पहुंच चुका है और उसके खिलाफ कई प्राथमिकियां (FIR) भी दर्ज हैं। न्यायालय को यह भी बताया गया कि वर्ष 2024 में दाखिल एक अन्य याचिका को हाईकोर्ट पहले ही खारिज कर चुका है और उस मामले में याची पर 50 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया गया था। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि याची ने वर्ष 1948 में अपने पक्ष में पट्टा निष्पादित होने का दावा किया है, जबकि उस समय उसकी उम्र लगभग आठ वर्ष थी। न्यायालय ने प्रथम दृष्टया उक्त पट्टे को फर्जी और मनगढ़ंत बताते हुए कहा कि इस आधार पर किया गया पूरा दावा कानूनन स्वीकार्य नहीं है। कोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि याची और उसके भाइयों द्वारा इसी प्रकार के कथित पट्टों के आधार पर कब्जाई गई सभी जमीनों की जानकारी शपथपत्र के साथ छह सप्ताह के भीतर प्रस्तुत की जाए। साथ ही, कब्जाई गई जमीनों से बेदखली की कार्रवाई कर उसकी रिपोर्ट भी दाखिल की जाए। न्यायालय ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राज्य सरकार की मिलीभगत पाई गई तो उसके खिलाफ भी सख्त आदेश पारित किए जाएंगे। मामले में जिलाधिकारी सुल्तानपुर को व्यक्तिगत शपथपत्र दाखिल करने का निर्देश देते हुए अगली सुनवाई 21 जुलाई 2026 तय की गई है।
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फर्जी पट्टों से सरकारी जमीन कब्जे पर हाईकोर्ट की टिप्पणी:सुल्तानपुर DM से रिपोर्ट मांगी, बेदखली कार्रवाई के निर्देश