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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक महत्वपूर्ण फैसले में पूर्व सैनिक पुष्कर सिंह कश्याल को दिव्यांगता पेंशन देने के सशस्त्र बल अधिकरण (एएफटी) के आदेश को बरकरार रखा है। न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने स्पष्ट किया कि बिना किसी ठोस कारण के केवल “एनएएनए” (नॉट एट्रीब्यूटेबल टू मिलिट्री सर्विस) लिखकर किसी सैनिक को दिव्यांगता पेंशन से वंचित नहीं किया जा सकता। न्यायालय ने अपने निर्णय में कहा कि सेना में प्रत्येक पोस्टिंग तनावपूर्ण होती है। इसलिए, सैनिकों से संबंधित कल्याणकारी कानूनों और नियमों की व्याख्या उदारतापूर्वक की जानी चाहिए। कोर्ट ने यह भी माना कि यदि कोई सैनिक सेवा के दौरान दिव्यांगता का शिकार होता है, तो उसे तकनीकी आधारों पर राहत से वंचित नहीं किया जा सकता। इसी तर्क के आधार पर, न्यायालय ने पूर्व सैनिक को दिव्यांगता पेंशन देने के अधिकरण के आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने दिव्यांग सैनिक की पेंशन का आदेश बरकरार:कोर्ट ने कहा- सिर्फ 'एनएएनए' लिखकर पेंशन नहीं छीनी जा सकती