प्रयागराज में बच्ची से रेप, मर्डर के आरोपी को फांसी:विशेष पॉक्सो कोर्ट ने कहा-जघन्य अमानवीय अपराध, दो लाख देने का आदेश


प्रयागराज की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने तीन साल की मासूम बच्ची से रेप और हत्या के आरोपी को फांसी की सजा सुनाई है। करीब छह साल पुराने दुष्कर्म एवं निर्मम हत्या के मामले में विशेष पॉक्सो अदालत ने सोमवार को फैसला आया। कोर्ट ने दोषी पाए गए गगन कुमार को फांसी की सजा सुनाई।
न्यायालय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 376ए (दुष्कर्म के परिणामस्वरूप मृत्यु) तथा धारा 302 (हत्या) दोनों अपराधों में अलग-अलग मृत्युदंड का आदेश पारित किया। प्रत्येक अपराध के लिए 25-25 हजार रुपये का अर्थदंड भी लगाया गया है। न्यायालय ने जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को पीड़िता के वैधानिक उत्तराधिकारियों को दो लाख रुपये की प्रतिकर राशि उपलब्ध कराने का भी निर्देश दिया है। यह फैसला अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष न्यायाधीश (पॉक्सो) विनोद कुमार चौरसिया ने राज्य सरकार की ओर से एडीजीसी (क्रिमिनल) विनय कुमार त्रिपाठी, बचाव पक्ष के अधिवक्ता गण के तर्कों को सुनकर एवं पत्रावली पर उपलब्ध सबूतों का अवलोकन करने के बाद दिया। कोर्ट ने कहा-अत्यंत जघन्य, अमानवीय दोषी ठहराए जाने और सजा सुनाने के दौरान कोर्ट ने कहा कि तीन वर्षीय मासूम के साथ दुष्कर्म कर उसकी हत्या किया जाना अत्यंत जघन्य, अमानवीय और समाज की अंतरात्मा को झकझोर देने वाला अपराध है।
ऐसे मामलों में कठोरतम दंड ही न्याय के उद्देश्य की पूर्ति कर सकता है। इसी आधार पर न्यायालय ने आरोपी को दोनों प्रमुख धाराओं में मृत्युदंड सुनाया। डेथ रेफरेंस हाईकोर्ट जाएगा कोर्ट ने आदेश दिया कि मृत्युदंड की पुष्टि के लिए समस्त अभिलेख नियमानुसार इलाहाबाद हाईकोर्ट भेजे जाएं। उच्च न्यायालय की पुष्टि के बाद ही मृत्युदंड का अंतिम क्रियान्वयन किया जाएगा।
साथ ही दोषी को अर्थदंड का भुगतान करने तथा पीड़ित परिवार को विधिक प्रावधानों के अनुसार प्रतिकर दिलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। जानिये कब कैसे हुआ था हत्याकांड 12 जून 2020 की शाम थाना हंडिया क्षेत्र के रघुपुर गांव में तीन वर्षीय मासूम अपने घर के बाहर खेल रही थी। उसी समय आरोपी गगन कुमार उसे टॉफी और खाने-पीने की चीजें दिलाने का बहाना बनाकर अपने साथ ले गया। देर रात तक बच्ची के घर नहीं लौटने पर परिजनों ने पूरे गांव में उसकी तलाश शुरू की। काफी खोजबीन के बाद आरोपी के घर के समीप बच्ची अचेत अवस्था में मिली। परिजन उसे बचाने का प्रयास करते रहे, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। घटना की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और मुकदमा दर्ज कर विवेचना शुरू की। साक्ष्य और सबूतों पर फैसला जांच के दौरान पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण किया, वैज्ञानिक एवं फोरेंसिक साक्ष्य एकत्र किए तथा पोस्टमार्टम कराया। चिकित्सीय परीक्षण में दुष्कर्म और गला दबाकर हत्या किए जाने के संकेत मिले। पुलिस ने विवेचना पूरी कर आरोपी के विरुद्ध धारा 376ए, 302 आईपीसी तथा पॉक्सो अधिनियम की धारा 5/6 के तहत आरोपपत्र न्यायालय में दाखिल किया। गवाही हुई, बचाव पक्ष के पास नहीं थी दलीलें विचारण के दौरान अभियोजन ने पीड़िता के पिता, माता, दादी, पोस्टमार्टम करने वाले चिकित्सक, विवेचक सहित कुल 13 गवाहों को न्यायालय में प्रस्तुत किया। न्यायालय ने मौखिक, चिकित्सीय, वैज्ञानिक, दस्तावेजी एवं परिस्थितिजन्य साक्ष्यों का गहन परीक्षण किया। अदालत ने पाया कि अभियोजन द्वारा प्रस्तुत साक्ष्य परस्पर संगत, विश्वसनीय और आरोपी के अपराध को संदेह से परे सिद्ध करने वाले हैं। इसके बाद आरोपी को दोषी ठहराया गया।

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