जांच कौन करेगा, सब बेईमान हैं:राम मंदिर चढ़ावा मामले में महंत कमलनयन दास बोले- कोई दूध का धुला नहीं


अयोध्या के श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट में दान व्यवस्था को लेकर उठे विवाद पर अयोध्या के प्रमुख महंत ने बड़ा बयान दिया है। श्रीराम मंदिर ट्रस्ट के अध्यक्ष महंत नृत्य गोपाल दास के उत्तराधिकारी महंत कमल नयन दास ने पूरे प्रकरण पर गहरी नाराजगी जताई है। उन्होंने कहा कि यदि कहीं कोई गड़बड़ी हुई है, तो उसकी जांच अवश्य होनी चाहिए, लेकिन आज जांच करने वालों की निष्पक्षता पर भी सवाल खड़े हैं। महंत बोले- भगवान ही न्याय करेंगे महंत कमल नयन दास ने कहा- आज स्थिति ऐसी है कि सब एक-दूसरे पर आरोप लगा रहे हैं. जो जांच कर रहे हैं, उनकी ईमानदारी पर भी सवाल हैं। ऐसे में निष्पक्ष जांच कैसे होगी? अंततः भगवान ही सब देख रहे हैं और वही न्याय करेंगे। आज जो लोग राम मंदिर और ट्रस्ट पर सवाल उठा रहे हैं, उन्हें भी अपने आचरण का आत्ममंथन करना चाहिए। जो लोग आज दूसरों पर उंगली उठा रहे हैं, क्या उन्होंने अपने जीवन में कभी कोई गलती नहीं की? जो कभी साइकिल पर चलते थे, वे आज बड़ी-बड़ी गाड़ियों में घूम रहे हैं और आलीशान भवनों में रह रहे हैं. आखिर यह सब कैसे हुआ, इसका जवाब भी समाज को मिलना चाहिए। हमारा लक्ष्य सेवा और समाज का कल्याण राम जन्मभूमि आंदोलन को याद करते हुए महंत कमल नयन दास ने कहा- उनके लिए हमेशा राष्ट्र और राम जन्मभूमि सर्वोपरि रहे हैं। कहा- हमने राम जन्मभूमि के लिए अपना जीवन समर्पित किया, जो करना था, वह हमने कर दिया। आज भी हमारा लक्ष्य सेवा और समाज का कल्याण है। किसी व्यक्ति विशेष या राजनीतिक विवाद से हमारा कोई लेना-देना नहीं है। दान और चढ़ावे के संबंध में उन्होंने कहा कि वर्षों तक मंदिरों में आने वाले सोने-चांदी और अन्य दान का हिसाब-किताब रखा जाता रहा है। कई बार श्रद्धालुओं द्वारा बिना नाम बताए भी बड़ी मात्रा में दान दिया जाता था, जिसकी जानकारी संबंधित व्यवस्थाओं में दर्ज होती रही है। संदेह है, तो जांच होनी चाहिए हालांकि महंत कमल नयन दास ने यह भी स्पष्ट किया कि यदि राम जन्मभूमि से जुड़े किसी भी मामले में संदेह है, तो उसकी जांच होनी चाहिए, लेकिन जांच पूरी तरह निष्पक्ष और पारदर्शी होनी चाहिए। अंततः हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है और भगवान के न्याय से कोई नहीं बच सकता। राम मंदिर के दान और चढ़ावे को लेकर चल रही बहस के बीच संत समाज के इस वरिष्ठ चेहरे का बयान चर्चा का विषय बन गया है। उनके वक्तव्य ने एक ओर जांच की मांग का समर्थन किया है, तो दूसरी ओर जांच एजेंसियों और व्यवस्था की विश्वसनीयता पर भी सवाल खड़े किए है।

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