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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने झांसी के नवाबाद थाना क्षेत्र से के एक मामले में गिरफ्तारी और रिमांड आदेश को अवैध करार देते हुए बंदी को तत्काल रिहा करने का निर्देश दिया है।
यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ और न्यायमूर्ति विवेक सरन की खंडपीठ ने बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। दलीलें सुनने के बाद आदेश याचिका धर्मेंद्र लखेड़ा की ओर से दाखिल की गई थी। याची के अधिवक्ता ने अदालत को बताया कि गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश में गंभीर कानूनी खामियां हैं। उन्होंने तर्क दिया कि गिरफ्तारी के आधार लिखित रूप में नहीं बताए गए तथा मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त विचार किए बिना रिमांड आदेश पारित कर दिया। इस संबंध में उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय के मिहिर राजेश शाह बनाम महाराष्ट्र राज्य मामले के निर्णय का हवाला दिया, जिसमें गिरफ्तारी के कारणों की लिखित सूचना देना अनिवार्य बताया गया है। गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश निरस्त राज्य पक्ष की दलीलें सुनने और अभिलेखों का परीक्षण करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि गिरफ्तारी और रिमांड आदेश कानून के अनुरूप नहीं थे। अदालत ने गिरफ्तारी मेमो और रिमांड आदेश को निरस्त करते हुए बंदी की तत्काल रिहाई का आदेश दिया। साथ ही रिमांड मजिस्ट्रेट को भविष्य में अधिक सावधानी बरतने की हिदायत दी और स्पष्ट किया कि संबंधित अधिकारी कानून के अनुसार नई कार्रवाई करने के लिए स्वतंत्र होंगे।
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गिरफ्तारी और रिमांड आदेश अवैध, बंदी को तत्काल रिहा:झांसी का मामला, मजिस्ट्रेट ने पर्याप्त विचार किए बिना आदेश पारित किया