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उन्नाव में गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे तटवर्ती इलाकों में बाढ़ का खतरा मंडराने लगा है। फतेहपुर चौरासी क्षेत्र के ग्राम दबौली के पास काली मिट्टी-शिवराजपुर मार्ग पर पिछले साल बाढ़ में कटा मुख्य रास्ता एक साल बाद भी नहीं बन पाया है। विभागीय अनदेखी के कारण हजारों ग्रामीणों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीणों का आरोप है कि पिछले वर्ष बाढ़ के दौरान सड़क कटने के बाद सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए दीवार खड़ी कर दी, लेकिन लोक निर्माण विभाग (PWD) ने क्षतिग्रस्त मार्ग के पुनर्निर्माण पर ध्यान नहीं दिया। दबौली गांव के पास काली मिट्टी-शिवराजपुर मार्ग आसपास के ग्रामीणों के लिए कानपुर और कन्नौज से जुड़ने का प्रमुख रास्ता था। पिछले साल गंगा में आई बाढ़ के तेज बहाव के कारण सड़क का बड़ा हिस्सा कटकर नदी में समा गया था। ग्रामीणों की कई शिकायतों के बाद सिंचाई विभाग ने कटान रोकने के लिए दीवार तो बना दी, लेकिन सड़क का निर्माण नहीं कराया गया। मुख्य मार्ग बंद होने के कारण आसपास के गांवों के लोगों को अब आवागमन के लिए करीब 25 किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ रही है। इसका सबसे अधिक असर किसानों, स्कूली बच्चों, नौकरीपेशा लोगों और मरीजों पर पड़ रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि यह मार्ग कई गांवों को मुख्य मार्ग से जोड़ने वाली जीवनरेखा है। एक साल बीत जाने के बाद भी रास्ता नहीं बनने से लोगों में नाराजगी है। गंगा फिर बढ़ी तो पुराने कटाव वाले स्थान पर बढ़ा खतरा ग्रामीण उमेश, सुरेश और महेंद्र ने बताया कि इस बार गंगा का जलस्तर फिर तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में पिछले वर्ष क्षतिग्रस्त हुए स्थान पर कटान दोबारा बढ़ने का खतरा बना हुआ है। अब कटान सड़क से आगे खेतों की ओर बढ़ने लगा है। यदि समय रहते बचाव कार्य नहीं किया गया तो खेतों को भी नुकसान हो सकता है। आसपास के आबादी क्षेत्र पर भी संकट बढ़ने की आशंका ग्रामीण जता रहे हैं। तटवर्ती इलाकों में बढ़ी दहशत, खेतों की ओर पहुंच रहा पानी डीएम घनश्याम मीणा के अनुसार, गंगा का जलस्तर बढ़ने से उन्नाव सदर, बांगरमऊ, सफीपुर और बीघापुर तहसील क्षेत्रों की गंगा कटरी में रहने वाले ग्रामीणों की चिंता बढ़ी है। तटवर्ती इलाकों में पानी बढ़ने के साथ ग्रामीण बाढ़ की आशंका को लेकर परेशान हैं। कई स्थानों पर गंगा का पानी खेतों की ओर बढ़ने लगा है। ग्रामीणों का कहना है कि पिछले अनुभव को देखते हुए इस बार भी बाढ़ से निपटने के लिए प्रशासन की तैयारियां पर्याप्त नजर नहीं आ रही हैं। अफसरों को सतर्क रहने के निर्देश, संवेदनशील क्षेत्रों का हो रहा निरीक्षण जिला प्रशासन की ओर से बाढ़ प्रभावित और संवेदनशील क्षेत्रों का निरीक्षण कर मातहत अधिकारियों को आवश्यक निर्देश दिए जा रहे हैं। प्रशासनिक स्तर पर बाढ़ से निपटने की तैयारियां किए जाने का दावा किया जा रहा है। हालांकि, दबौली के ग्रामीणों का कहना है कि जब एक साल पहले बाढ़ में कटा प्रमुख मार्ग आज तक नहीं बन सका तो अचानक बढ़ते जलस्तर के बीच प्रशासन की तैयारियों पर भरोसा करना मुश्किल है। ग्रामीणों ने PWD और सिंचाई विभाग पर लगाया लापरवाही का आरोप स्थानीय लोगों का आरोप है कि सड़क निर्माण को लेकर PWD और कटान रोकने को लेकर सिंचाई विभाग ने गंभीरता नहीं दिखाई। ग्रामीणों के मुताबिक, यदि समय रहते सड़क का निर्माण करा दिया जाता और कटान रोकने के स्थायी इंतजाम किए जाते तो आज समस्या इतनी गंभीर नहीं होती। अब गंगा का जलस्तर फिर बढ़ने से पुराने कटाव वाले स्थान पर खतरा और बढ़ गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से काली मिट्टी-शिवराजपुर मार्ग के दबौली में क्षतिग्रस्त हिस्से का तत्काल निर्माण कराने की मांग की है। साथ ही गंगा के बढ़ते जलस्तर को देखते हुए कटान रोकने के लिए प्रभावी और स्थायी बचाव कार्य कराने की मांग की है, ताकि सड़क के साथ खेतों और ग्रामीणों की सुरक्षा भी सुनिश्चित हो सके।
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उन्नाव में गंगा बढ़ी तो सामने आई विभागीय लापरवाही:दबौली में एक साल से नहीं बना बाढ़ में कटा मुख्य मार्ग; 25 किमी घूमकर जा रहे ग्रामीण