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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग की वर्ष 2016 की आईटीआई अनुदेशक (फैशन टेक्नोलॉजी) भर्ती प्रक्रिया से जुड़े मामले में सुनवाई करते हुए याची एकता सिंह को इंटरव्यू में प्रोविजनल रूप से शामिल होने की अनुमति दी है।
कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया है कि याची का परिणाम न्यायालय की अनुमति के बिना घोषित नहीं किया जाएगा। जानये कोर्ट ने क्या कहा यह आदेश न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने एकता सिंह की याचिका पर उसके अधिवक्ता सुनील कुमार व वीरेंद्र कुमार गौतम और आयोग के अधिवक्ता को सुनकर दिया है। मामले के तथ्यों के अनुसार उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग ने 28 नवंबर 2016 को विज्ञापन संख्या 16(4)2016 के तहत अनुदेशक (सामान्य चयन) के 293 स्थायी पदों के लिए आवेदन मांगे थे। याची ने फैशन टेक्नोलॉजी ट्रेड के लिए आवेदन किया था। याची के अनुसार उसने उत्तर प्रदेश औद्योगिक प्रशिक्षण संस्थान (अनुदेशक) सेवा नियमावली 2014 के तहत 51.5115 प्रतिशत अंक प्राप्त किए हैं, जो सामान्य वर्ग के लिए निर्धारित कट-ऑफ (41.30%) से काफी अधिक हैं। इसके बावजूद आयोग ने 11 जुलाई से को आदेश जारी कर याची को इंटरव्यू की सूची से बाहर कर दिया। आयोग के अधिवक्ता सिद्धार्थ सिंघल ने कहा कि नियमावली के तहत नेशनल ट्रेड सर्टिफिकेट धारकों के लिए तीन वर्ष का कार्य अनुभव अनिवार्य है। उनका तर्क था कि नेहा राव बनाम यूपी राज्य फैसले के अनुसार अनुभव की गणना आईटीआई कोर्स पूरा होने और परिणाम घोषित होने के बाद ही की जा सकती है। आयोग ने याची के अनुभव प्रमाणपत्र की प्रामाणिकता पर भी संदेह जताया। याची के अधिवक्ता सुनील कुमार व वीरेंद्र कुमार गौतम ने तर्क दिया कि नेहा राव वाले फैसले को पहले ही स्पेशल अपील के माध्यम से चुनौती दी जा चुकी है और मामला अभी लंबित है। उनका कहना था कि अंतिम प्रमाण पत्र मिलने से पहले, संस्थान के प्रधानाचार्य द्वारा जारी प्रोविजनल सर्टिफिकेट के आधार पर हासिल किए गए अनुभव को खारिज नहीं किया जा सकता। कोर्ट ने गंभीरता देखी कोर्ट ने मामले की गंभीरता और कानूनी पेच को देखते हुए कहा कि मुख्य कानूनी सवालआईटीआई सर्टिफिकेट से पहले का अनुभव मान्य है या नहीं, अपीलीय न्यायालय के समक्ष लंबित है इसलिए याची को अंतरिम राहत दी जानी चाहिए। कोर्ट ने याची को इंटरव्यू में शामिल करने का निर्देश दिया। साथ ही आयोग को निर्देश दिया कि इंटरव्यू के बाद याची के अनुभव प्रमाणपत्र की सत्यता और प्रामाणिकता की जांच कर लें। याची का चयन परिणाम हाईकोर्ट की अनुमति के बिना जारी नहीं किया जाएगा। कोर्ट ने राज्य सरकार और आयोग को याचिका पर जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का समय दिया है।
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आईटीआई अनुदेशक भर्ती के इंटरव्यू में शामिल करें:कोर्ट ने कहा- परिणाम न्यायालय की अनुमति के बिना घोषित नहीं होगा