GSVM मेडिकल कॉलेज अब अटल बिहारी वाजपेयी यूनिवर्सिटी से जुड़ेगा:डॉक्टरों के साथ एमबीबीएस छात्र भी करेंगे रिसर्च, 20 करोड़ से बनेगी स्किल लैब


कानपुर के गणेश शंकर विद्यार्थी मेमोरियल (जीएसवीएम) मेडिकल कॉलेज और इससे जुड़े अस्पतालों के दिन अब पूरी तरह बदलने वाले हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज जल्द ही लखनऊ की अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनने जा रहा है। इस बड़े बदलाव के बाद कैंपस में न सिर्फ इलाज की सुविधाएं विश्वस्तरीय होंगी, बल्कि मेडिकल रिसर्च (शोध) को भी एक नई उड़ान मिलेगी। अटल बिहारी वाजपेयी मेडिकल यूनिवर्सिटी के कुलपति मेजर जनरल डॉ. अमित देवगन ने हाल ही में जीएसवीएम और इससे संबद्ध पीजीआई का बारीकी से निरीक्षण किया था। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. संजय काला ने इस ऐतिहासिक फैसले की पुष्टि की है। इस नए जुड़ाव से कानपुर ही नहीं, बल्कि आसपास के कई जिलों के मरीजों को सीधा फायदा मिलेगा। डॉक्टरों और छात्रों पर बरसेगा पैसा,रिसर्च के लिए मिलेंगे लाखों रुपये अब तक मेडिकल कॉलेजों में बजट की कमी के कारण रिसर्च का काम थमा रहता था, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। इस नई व्यवस्था के तहत डॉक्टरों को शोध के लिए वित्तीय मदद मिलेगी। अगर कोई एक विभाग रिसर्च प्रोजेक्ट तैयार करता है, तो उसे 5 लाख रुपये मिलेंगे। वहीं, अगर तीन अलग-अलग विभागों के डॉक्टर मिलकर कोई बड़ा प्रोजेक्ट करते हैं, तो सीधे 15 लाख रुपये का बजट जारी होगा। सबसे अनोखी बात यह है,कि पहली बार एमबीबीएस की पढ़ाई कर रहे छात्रों को भी रिसर्च की संस्कृति से जोड़ने के लिए प्रति छात्र 35 हजार रुपये दिए जाएंगे। इसके अलावा राष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस के लिए हर साल 1 लाख और अंतरराष्ट्रीय स्तर की कॉन्फ्रेंस के लिए डॉक्टरों को 5 लाख रुपये तक का बजट मिलेगा। 20 करोड़ से बनेगी हाईटेक स्किल लैब, छात्र सीखेंगे रोबोटिक सर्जरी जीएसवीएम कैंपस में करीब 20 करोड़ रुपये की भारी-भरकम लागत से एक अत्याधुनिक ‘स्किल लैब’ तैयार की जाएगी। इस लैब के बनने के बाद हमारे भविष्य के डॉक्टर यानी एमबीबीएस के छात्र-छात्राएं कंप्यूटर सिमुलेटर के जरिए लेप्रोस्कोपिक (दूरबीन) और रोबोटिक सर्जरी जैसी एडवांस तकनीक कॉलेज में ही सीख सकेंगे। इस लैब में सिर्फ कानपुर ही नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश के दूसरे सरकारी एलोपैथिक मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों और हैलट सहित 5 बड़े अस्पतालों को मिलेगा यूनिवर्सिटी के संसाधनों का फायदा
जीएसवीएम से कानपुर के पांच सबसे प्रमुख अस्पताल जुड़े हुए हैं, जिनमें हैलट अस्पताल, जच्चा-बच्चा अस्पताल, बाल रोग अस्पताल, मुरारी लाल चेस्ट अस्पताल और संक्रामक रोग अस्पताल शामिल हैं। यूनिवर्सिटी का हिस्सा बनने के बाद इन सभी अस्पतालों को सीधे तौर पर नेशनल लेवल का नेटवर्क और बड़े संसाधन मिलेंगे, जिससे यहां आने वाले गरीब मरीजों को बेहद आधुनिक और सस्ता इलाज मिल सकेगा।

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