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कानपुर के सचेंडी थाना क्षेत्र की चकरपुर मंडी से दो जुलाई को रहस्यमय परिस्थितियों में लापता हुए आलू व्यापारी का शव 27 दिन बाद पहचान में आने से पुलिस की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। परिजनों का आरोप है कि गुमशुदगी दर्ज होने और मुकदमा कायम होने के बावजूद पुलिस व्यापारी की पहचान नहीं कर सकी और अज्ञात शव मानकर उसका अंतिम संस्कार करा दिया। मामले के खुलासे के बाद परिजनों और व्यापारियों में भारी आक्रोश है। लापता होने के बाद दर्ज हुआ था मुकदमा जूही निवासी मनोज कुमार शुक्ला ने बताया कि उनके भाई देवेश शुक्ला चकरपुर मंडी स्थित अपनी आलू आढ़त से दो जुलाई को लापता हो गए थे। काफी तलाश के बाद भी उनका कोई सुराग नहीं मिला तो सचेंडी थाने में सूचना दी गई। पांच जुलाई को पुलिस ने व्यापारी संजू पाल, उसके मुंशी टिंकू यादव और एक अज्ञात ऑटो चालक के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने संजू पाल को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया, जबकि देवेश की तलाश जारी होने की बात कहती रही। कोतवाली में पोस्टर देखकर हुई पहचान शनिवार को परिजन किसी काम से कोतवाली पहुंचे, जहां अज्ञात शवों से संबंधित पोस्टर देखकर उन्हें संदेह हुआ। फोटो और विवरण का मिलान करने पर शव की पहचान देवेश शुक्ला के रूप में हुई। यह जानकारी मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। शाम को परिजन और मंडी के व्यापारी सचेंडी थाने पहुंचे और पुलिस अधिकारियों से जवाब मांगा। अस्पताल पहुंचा था, फिर अज्ञात शव मानकर कर दिया अंतिम संस्कार पुलिस के अनुसार तीन जुलाई को एक एंबुलेंस देवेश को गंभीर घायल अवस्था में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कल्याणपुर लेकर पहुंची थी। वहां से उन्हें उर्सला अस्पताल रेफर किया गया, जहां सात जुलाई को इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पहचान नहीं होने के कारण पनकी पुलिस ने पंचनामा भरकर 10 जुलाई को अज्ञात शव मानते हुए अंतिम संस्कार करा दिया। पोस्टमार्टम में सिर पर गंभीर चोट, बढ़ा संदेह सूत्रों के मुताबिक पोस्टमार्टम रिपोर्ट में सिर पर गंभीर चोट मिलने का उल्लेख है। परिजनों का कहना है कि यह मामला सामान्य दुर्घटना नहीं लगता और इसकी निष्पक्ष व गहन जांच होनी चाहिए। उनका आरोप है कि यदि पुलिस ने गुमशुदगी, अस्पतालों और अज्ञात शवों के रिकॉर्ड का समय रहते मिलान किया होता तो परिवार अपने सदस्य की पहचान कर अंतिम दर्शन कर सकता था। व्यापारियों ने पुलिस पर उठाए सवाल व्यापारियों ने मामले में जिम्मेदार पुलिसकर्मियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि समन्वय की कमी के कारण एक परिवार अपने सदस्य का अंतिम संस्कार तक नहीं कर सका। उन्होंने पूरे प्रकरण की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की है। डीसीपी बोले- लापरवाही मिली तो होगी कार्रवाई डीसीपी वेस्ट एस.एम. कासिम आबिदी ने कहा कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। यदि जांच में किसी पुलिसकर्मी की लापरवाही सामने आती है तो उसके खिलाफ आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। परिजनों द्वारा लगाए गए सभी आरोपों की जांच की जा रही है।
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लापता व्यापारी का शव 27 दिन बाद पहचान में आया:पुलिस ने अज्ञात मानकर करा दिया था अंतिम संस्कार, पोस्टमार्टम में सिर पर चोट मिली थी