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सदर तहसील के अंगूठी गांव में अमृत सरोवर तालाब की जमीन को कब्जामुक्त कराने के लिए बुधवार को प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) और तहसील न्यायालय के आदेश पर तालाब की भूमि पर बने मंदिर, मस्जिद और मजार को बुलडोजर चलाकर हटा दिया गया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए गांव में भारी पुलिस बल और पीएसी तैनात रही। प्रशासन ने दावा किया कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई और कहीं से किसी विरोध या अप्रिय घटना की सूचना नहीं मिली। बुधवार सुबह प्रशासन और पुलिस की संयुक्त टीम गांव अंगूठी पहुंची। अधिकारियों की निगरानी में तालाब की भूमि पर बने धार्मिक ढांचों को हटाने की कार्रवाई शुरू की गई। जेसीबी और बुलडोजर की मदद से मंदिर, मस्जिद और मजार को हटाकर तालाब की भूमि को कब्जामुक्त कराया गया। कार्रवाई के दौरान पूरे क्षेत्र को सुरक्षा घेरे में रखा गया। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए कई थानों की पुलिस फोर्स, पीएसी और अतिरिक्त सुरक्षा बल मौके पर तैनात रहे। गांव और आसपास के क्षेत्रों में पुलिस ने लगातार गश्त की। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल लगाया गया ताकि कानून-व्यवस्था बनी रहे। मौके पर एडीसीपी हिमांशु गौरव, एसीपी इमरान अहमद, एसीपी रामप्रवेश गुप्ता समेत पुलिस और प्रशासन के कई वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने पूरी कार्रवाई की निगरानी की और सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। अमृत सरोवर तालाब की भूमि पर बने थे धार्मिक ढांचे जानकारी के अनुसार ब्लॉक बिचपुरी के गांव अंगूठी में अछनेरा-बिचपुरी मार्ग के किनारे करीब साढ़े 22 बीघा भूमि राजस्व अभिलेखों में तालाब के रूप में दर्ज है। इस तालाब को अमृत सरोवर का दर्जा भी प्राप्त है। तालाब परिसर में मंदिर, मस्जिद और मजार स्थित होने के कारण मामला संवेदनशील माना जा रहा था। ग्रामीणों की ओर से लंबे समय से तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने की मांग की जा रही थी। उनका कहना था कि तालाब की जमीन पर कब्जों के कारण उसका मूल स्वरूप प्रभावित हो रहा है। इसी को लेकर मामला न्यायालय तक पहुंचा था। NGT की मुख्य पीठ में पहुंचा था मामला तहसील प्रशासन के अनुसार तालाब की भूमि पर अतिक्रमण का मामला राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) की मुख्य पीठ, नई दिल्ली में विचाराधीन था। सुनवाई के बाद एनजीटी ने तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराने के निर्देश दिए थे। एनजीटी के आदेश के अनुपालन में तहसीलदार न्यायालय ने 9 जून को बेदखली का आदेश पारित किया था। इसी आदेश के आधार पर बुधवार को प्रशासन ने कार्रवाई करते हुए तालाब की भूमि को कब्जामुक्त कराया। सुबह सात बजे से ही संभाल लिया था मोर्चा मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए प्रशासन और पुलिस ने सुबह करीब सात बजे से ही गांव में मोर्चा संभाल लिया था। अधिकारियों ने पूरे इलाके की निगरानी की और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर विशेष सतर्कता बरती। कार्रवाई शुरू होने से पहले ही गांव और आसपास के क्षेत्र में पुलिस बल तैनात कर दिया गया था। सुबह करीब नौ बजे प्रशासन ने बुलडोजर और जेसीबी मशीनों के साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई शुरू की। अधिकारियों की मौजूदगी में धार्मिक ढांचों को हटाया गया और तालाब की भूमि को खाली कराया गया। प्रशासन बोला- शांतिपूर्ण तरीके से पूरी हुई कार्रवाई उप जिलाधिकारी सदर सचिन राजपूत ने बताया कि न्यायालय और एनजीटी के निर्देशों के अनुपालन में तालाब की भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। उन्होंने कहा कि पूरी कार्रवाई शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई है और क्षेत्र में स्थिति सामान्य बनी हुई है। प्रशासन का कहना है कि न्यायालय के आदेशों का पालन करते हुए निष्पक्ष तरीके से कार्रवाई की गई है और कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम किए गए थे। जल संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा ग्रामीणों की नजरें लंबे समय से इस कार्रवाई पर टिकी थीं। स्थानीय लोगों का मानना है कि तालाब की भूमि कब्जामुक्त होने के बाद जल संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा और अमृत सरोवर योजना के तहत तालाब का बेहतर विकास किया जा सकेगा। साथ ही क्षेत्र में पर्यावरणीय संतुलन बनाए रखने में भी मदद मिलेगी। प्रशासन का कहना है कि तालाब की भूमि को पूरी तरह सुरक्षित रखने और उसके संरक्षण के लिए आगे भी आवश्यक कदम उठाए जाएंगे।
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मंदिर, मस्जिद और मजार पर चला बुलडोजर:छावनी बना अंगूठी गांव, तालाब की जमीन पर अवैध रूप से बने थे धार्मिक ढांचे