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प्रयागराज में सोमवार को उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र (NCZCC) और चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी के संयुक्त तत्वावधान में ‘बैसाखी महोत्सव’ का आयोजन किया गया। इस दौरान पंजाब की समृद्ध लोक संस्कृति की मनमोहक झलक देखने को मिली। सांस्कृतिक केंद्र के प्रेक्षागृह में ढोल की थाप, सारंगी की सुरीली तान और लोक गीतों ने दर्शकों को देर रात तक मंत्रमुग्ध रखा। महोत्सव का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। इस अवसर पर मुख्य अतिथि सरदार मंजीत सिंह, चंडीगढ़ संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष सुखमिंदर कौर बराड़, फिल्म निर्माता दीपक खन्ना, केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, उप निदेशक डॉ. मुकेश उपाध्याय और कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय मौजूद रहे। कार्यक्रम का संचालन हिमानी रावत ने किया। कार्यक्रम की शुरुआत फोक ऑर्केस्ट्रा ग्रुप की प्रस्तुति से हुई। गायिका मनप्रीत कौर ने ‘आया लाड़ईए तैनु शेरहा वाला व्यावन आया’ और ‘काला डोरिया’ जैसे लोकप्रिय पंजाबी गीत प्रस्तुत किए। उनकी प्रस्तुति पर दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाईं। इसके बाद, प्रसिद्ध गायिका राखी हुंदल ने ‘मेरी जुगनी दे धागे पक्के’ और ‘भाभो कड़ ले संदूक चो गरारा’ जैसे गीतों से अपनी मधुर आवाज का जादू बिखेरा। गायक कुलदीप तूर ने ‘नित खैर मंगा सोह्णेया मैं तेरी’ और ‘अंखियां नु रहन दे’ जैसे सूफियाना गीत प्रस्तुत कर कार्यक्रम को रूहानी रंग दिया। सुखविंदर कौर के सूफी गीतों ने भी दर्शकों को मंत्रमुग्ध किया। कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण परमजीत पम्मी और उनके दल की प्रस्तुति रही। उन्होंने ढोल, बांसुरी, हारमोनियम, सारंगी, अलगुजा और तुंबी जैसे पारंपरिक वाद्ययंत्रों की जुगलबंदी पेश की। इस शानदार प्रस्तुति ने दर्शकों को पंजाब के लोक जीवन और मेलों की याद दिलाई। पूरे आयोजन के दौरान प्रेक्षागृह दर्शकों से खचाखच भरा रहा। हर प्रस्तुति पर दर्शकों ने उत्साहपूर्वक तालियां बजाकर कलाकारों का हौसला बढ़ाया। इस बैसाखी महोत्सव ने प्रयागराज में पंजाब की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत कर एक यादगार शाम का अनुभव कराया।
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प्रयागराज में बैसाखी महोत्सव, पंजाब की संस्कृति का प्रदर्शन:ढोल-सारंगी की जुगलबंदी और लोकगीतों ने दर्शकों का मन मोहा