संभल में कल कब्रिस्तान से अवैध मस्जिद मुस्तफा कादरी टूटेगी:प्रशासन ने टीम गठित की, नगर पालिका-पंचायत से बुलडोजर-डंपर, सफाई कर्मी मांगे


संभल में कब्रिस्तान और सार्वजनिक भूमि पर अवैध रूप से निर्मित मस्जिद को हटाने का आदेश जारी किया गया है। तहसीलदार न्यायालय से बेदखली का आदेश पारित होने के बाद मस्जिद कमेटी की जिलाधिकारी न्यायालय में अपील भी खारिज हो गई है। प्रशासन ने इस कार्रवाई के लिए नगर पालिका से बुलडोजर और डंपर सहित अन्य संसाधन मांगे हैं। संभल के तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने शुक्रवार रात 10 बजे यह आदेश जारी किया। यह मस्जिद जनपद संभल के थाना नखासा क्षेत्र के गांव कसेरुआ में कब्रिस्तान की भूमि पर अवैध रूप से बनाई गई है। आदेश में सरकारी भूमि को कब्जा मुक्त करने का निर्देश दिया गया है। इस कार्रवाई के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। इसमें नायब तहसीलदार दीपक कुमार जुरैल, राजस्व निरीक्षक शिवदयाल सिंह, पंकज गुप्ता, चंद्रपाल सिंह और दस लेखपाल शामिल हैं। प्रशासन ने नगर पालिका से चार जेसीबी, डंपर-ट्रैक्टर और 20 सफाई कर्मियों की मांग की है। गाटा संख्या 409 कब्रिस्तान की भूमि है, जिस पर लगभग 1100-1200 वर्गमीटर क्षेत्र में यह मस्जिद निर्मित है। इस भूमि पर तीन अन्य मकान भी बने हुए हैं। प्रशासन का कहना है कि कब्रिस्तान की भूमि पर मस्जिद का निर्माण कानूनी और धार्मिक दोनों ही दृष्टिकोण से गलत है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भी कब्रिस्तान की जमीन पर मस्जिद नहीं बनाई जा सकती। इसके अतिरिक्त, गाटा संख्या 410, जो खाद के गड्ढे की भूमि है, उसके 600 वर्गमीटर क्षेत्र पर आठ मकान बने हैं। इसी भूमि पर मस्जिद का सुन्नी वक्फ बोर्ड में इंद्राज भी है। गाटा संख्या 411 वृक्षारोपण की जमीन है, जहां गांव के एक व्यक्ति द्वारा 1001 वर्गमीटर में खेती की जा रही है। पूर्व में, तथ्यों को छुपाकर और सेंट्रल वक्फ बोर्ड के समक्ष गलत साक्ष्य प्रस्तुत कर संपत्ति को वक्फ घोषित कराने के मामले में लेखपाल की शिकायत पर पुलिस ने सात लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की थी। जांच में एक मस्जिद, 11 मकान और 1000 वर्ग मीटर भूमि पर खेती होती हुई पाई गई थी। इन सभी मामलों में आरक्षित ग्राम सभा संपत्ति पर अवैध कब्जा कर उसे नुकसान पहुंचाया गया है। बीती 09 जनवरी को हल्का लेखपाल खबर हुसैन के पैमाइश करने के बाद 18 जनवरी 2026 को लेखपाल की शिकायत पर जाकिर हुसैन पुत्र अफसर, तस्लीम पुत्र अब्दुल मजीद, भूरे अली पुत्र शब्बीर, शरफुद्दीन पुत्र मुजीजुद्दीन, दिल शरीफ पुत्र शरीफ अहमद, मोहबाद अली पुत्र दिलबर एवं नन्हे पुत्र असलम के विरुद्ध BNS की धारा 329(3) एवं सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण 1984 की धारा 2 व 3 के अंतर्गत रिपोर्ट दर्ज की गई थी।
तहसीलदार धीरेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि गांव कसेरुआ के लोगों के द्वारा जिलाधिकारी को एप्लीकेशन दी गई थी कि हमारे गाँव में कब्रिस्तान की जमीन नहीं है, उसे सुरक्षित किया जाए। जब अभिलेखों की जाँच कराई गई तो यह पाया गया कि कब्रिस्तान की भूमि पर मस्जिद बनाकर के कब्जा कर लिया गया है और इसके विरुद्ध धारा 67 की कार्रवाई की गई। इसमें मस्जिद कमेटी की ओर से प्रतिभाग भी किया गया, परन्तु इन लोगों ने कोई ऐसा साक्ष्य नहीं प्रस्तुत किया, जिससे कि यह सिद्ध हो सके कि यह मस्जिद इनकी इंडिपेंडेंट लैंड पर बनी हुई है। मेरे न्यायालय से इनके विरुद्ध बेदखली का आदेश पारित किया जा चुका है।

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