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इलाहाबाद हाईकोर्ट ने पंचायती राज विभाग, के प्रमुख सचिव और अधिकारियों को सख्त चेतावनी दी है कि अगर अगली सुनवाई से पहले आदेश पारित नहीं किया गया, तो उनके खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू की जाएगी। यह आदेश मुख्य न्यायाधीश अरुण भंसाली और न्यायमूर्ति क्षितिज शैलेन्द्र की खंडपीठ ने जनहित याचिका की सुनवाई करते हुए दिया है। यूपी सरकार पर भी आरोप जितेंद्र सिंह द्वारा दायर जनहित याचिका में उत्तर प्रदेश सरकार और आठ अन्य प्रतिवादियों के खिलाफ यह आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी संख्या 9 जालौन के क्षेत्र पंचायत प्रमुख अर्जुन सिंह के विरुद्ध कार्रवाई करने में जानबूझकर देरी की जा रही है, ताकि उसे बचाया जा सके। यह मामला 27 अक्टूबर 2025 से कोर्ट में लंबित है और अब तक कई आदेश पारित हो चुके हैं। कोर्ट ने पाया कि प्रतिवादियों की ओर से पेश निर्देशों में केवल तारीखों और औपचारिक कार्यवाहियों का उल्लेख था, जबकि 22 जुलाई 2025 से एक साल बीत जाने के बावजूद कोई ठोस प्रगति नहीं हुई थी। कोर्ट ने कहा कि यह रवैया याचिकाकर्ता के इस आरोप को बल देता है कि प्रतिवादी संख्या 9 को बचाने का प्रयास किया जा रहा है। कोर्ट ने पंचायती राज विभाग के विशेष सचिव को 1 सितंबर 2026 तक आदेश पारित न होने पर व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होने का निर्देश दिया था।इस पर विशेष सचिव की ओर से छूट आवेदन दाखिल किया गया, जिसमें बताया गया कि उनके बेटे को डेंगू है, इसलिए वे व्यक्तिगत रूप से उपस्थित नहीं हो सकते। कोर्ट ने पाया कि छूट आवेदन में भी आदेश पारित करने की कोई मंशा नहीं दिखाई गई। सरकारी अधिवक्ता ने बताया कि वास्तविक आदेश प्रमुख सचिव, पंचायती राज विभाग द्वारा पारित किया जाना है। कोर्ट ने प्रमुख सचिव और संबंधित स्वीकृति देने वाले अन्य अधिकारियों को अगली तारीख से पहले आवश्यक कार्रवाई पूरी करने का निर्देश दिया, पालन न करने पर अवमानना कार्यवाही की चेतावनी दी। मामले की अगली सुनवाई 28 सितंबर 2026 को होगी। अगर उस दिन तक भी आदेश पारित नहीं हुआ, तो प्रमुख सचिव और विशेष सचिव दोनों को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में उपस्थित होना होगा।
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पंचायती राज विभाग प्रमुख सचिव को कार्रवाई की चेतावनी:हाईकोर्ट ने कहा मुख सचिव, विशेष सचिव कोर्ट को उपस्थित होना होगा