'किसी चीज में खुशी नहीं मिलती..दुनिया छोड़कर जा रहा हूं':मुरादाबाद में पैरामेडिकल छात्र ने भाई को व्हाट्सएप मैसेज भेजकर किया सुसाइड


मुरादाबाद में बीएससी ऑप्टोमेट्री ने छात्र ने बड़े भाई को व्हाट्सएप पर दो पेज का सुसाइड संदेश भेजने के बाद सुसाइड कर लिया। भाई को भेजे मैसेज में छात्र ने लिखा- “भैय्या, मैं अपने आप से परेशान हूं, इसलिए जान दे रहा हूं। मेरा मन इस दुनिया और इस जीवन में बिल्कुल नहीं लगता। ऐसा लगता है जैसे मैं इस दुनिया में अस्थायी हूँ और मेरा यहां कुछ भी अपना नहीं है। कभी-कभी मन में बहुत नकारात्मक विचार आते हैं और ऐसा लगता है कि सब कुछ छोड़कर चला जाऊं। मैं बहुत परेशान और थका हुआ महसूस कर रहा हूं। ” इससे पहले कि बड़ा भाई ये व्हाट्सएप मैसेज पढ़ पाता, उसके पहले ही छात्र ने फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मैसेज पढ़ते ही बड़े भाई ने तुरंत कॉल किया, लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। मूल रूप से हरदोई जिले के शाहबाद निवासी आशुतोष शुक्ला मुरादाबाद में सीएल गुप्ता आई इंस्टीट्यूट में बीएससी ऑप्टोमेट्री का द्वितीय वर्ष का छात्र था। वह रामगंगा विहार में किराए के कमरे में रहता था। मंगलवार देर रात आशुतोष ने अपने बड़े भाई आकाश को व्हाट्सएप पर मैसेज कर आत्महत्या करने की बात लिखी। आकाश ने यह मैसेज बुधवार तड़के देखा। मैसेज को देखते ही आकाश का कलेजा कांप उठा। उन्होंने तुरंत भाई को लगातार फोन किया। फोन न उठने पर उसके सहपाठियों को फोन किया। सहपाठी आशुतोष के कमरे की ओर भागे, तब तक बहुत देर हो चुकी थी। आशुतोष फंदे पर लटका हुआ था।

घटना की सूचना तुरंत पुलिस को दी गई। पुलिस की मौजूदगी में शव फंदे से नीचे उतारा गया। दोपहर में छात्र के पिता जयप्रकाश शुक्ला मुरादाबाद पहुंचे। उन्होंने बताया कि मंगलवार की रात करीब 10 बजे उनकी आशुतोष से आखिरी बार बात हुई थी। तब उसने कोई परेशानी तो नहीं बताई थी लेकिन इतना जरूर कहा था कि रुपए कुछ कम हैं। इसके बाद आशुतोष के पिता ने उसे 10 हजार रुपए ट्रांसफर कर दिए थे।

छात्र का सुसाइड नोट
दो पन्नों के सुसाइड नोट में आशुतोष ने लिखा है…
” मुझे अब किसी चीज में खुशी महसूस नहीं होती। मेरा मन इस दुनिया और इस जीवन में बिल्कुल नहीं लगता। ऐसा लगता है जैसे मैं इस दुनिया में अस्थायी हूं और मेरा यहां कुछ भी अपना नहीं है। कभी-कभी मन में बहुत नकारात्मक विचार आते हैं और ऐसा लगता है कि सब कुछ छोड़कर चला जाऊं। मैं बहुत परेशान और थका हुआ महसूस कर रहा हूं। मैं यह भी कहना चाहता हूं कि मेरी मां और मेरे भाई का हमेशा ध्यान रखा जाए।

मैं उनसे दिल से माफी मांगना चाहता हूं और उनसे कहना चाहता हूं कि अगर मेरी किसी बात से उन्हें दुख पहुंचा हो तो मुझे माफ कर दें। मुझे अपने परिवार की बहुत चिंता है। मेरी इच्छा है कि मेरी मां और भाई हमेशा खुश रहें और अपना ध्यान रखें। मैं इस समय बहुत कठिन मानसिक स्थिति से गुजर रहा हूं। मुझे किसी ऐसे व्यक्ति की जरूरत है जो मेरी बात सुने, मुझे समझे और इस समय मेरे साथ रहे।
किसी का कोई बकाया नहीं है। बस 2,580 रुपये टिफिन के और 500 रुपये लाइट के देख लेना।”

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *