2 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

भारतीय सेना के एविएशन पायलटों ने शनिवार को नुन कुन पर्वत समूह के पास 18,600 फीट की ऊंचाई पर मरीज को सुरक्षित निकाला। तेज हवाओं और बेहद कठिन पहाड़ी इलाके के बीच यह बचाव अभियान चलाया गया।
पायलटों ने खड़ी पहाड़ी ढलान से मरीज को हेलिकॉप्टर में पहुंचाया। अभियान के दौरान वहां उतरने के लिए कोई सामान्य जगह नहीं थी और दिन की आखिरी रोशनी तेजी से खत्म हो रही थी।
ऊंचाई पर उड़ान के लिए हेलिकॉप्टर हल्का किया
18,600 फीट की ऊंचाई पर हवा का दबाव कम होने से इंजन की क्षमता और रोटर से मिलने वाली लिफ्ट घट जाती है। इस स्थिति में उड़ान भरने के लिए हेलिकॉप्टर से सभी गैर-जरूरी उपकरण हटा दिए गए।
हेलिकॉप्टर में केवल सीमित ईंधन रखा गया, ताकि लिफ्ट क्षमता बढ़ाई जा सके। साथ ही, मरीज को निकालने का अभियान पूरा करने के लिए जरूरी दूरी तय करने जितना ईंधन बचा रहे।
एक स्किड के सहारे ढलान पर रोका हेलिकॉप्टर
मरीज की जगह पहुंचने पर चालक दल को तेज पहाड़ी हवाओं और खड़ी ढलान का सामना करना पड़ा। वहां हेलिकॉप्टर उतारने के लिए कोई सामान्य लैंडिंग स्पेस नहीं था।
पायलटों ने हेलिकॉप्टर को बेहद कम ऊंचाई पर स्थिर रखा। इसके बाद तकनीकी तरीका अपनाते हुए हेलिकॉप्टर का सिर्फ एक स्किड ढलान से टिकाया और उसे संतुलित रखा।
चालक दल ने मरीज को तेजी से हेलिकॉप्टर में सुरक्षित किया। इसके बाद हेलिकॉप्टर ने वहां से उड़ान भरी और सुरक्षित नीचे उतरा।
फायर एंड फ्यूरी कोर ने एक्स पर दी जानकारी
फायर एंड फ्यूरी कोर, भारतीय सेना के आधिकारिक एक्स अकाउंट पर कहा गया, “नुन कुन के पास 18,600 फीट की ऊंचाई पर चलाए गए साहसिक बचाव अभियान में भारतीय सेना के एविएशन पायलटों ने बेहद कठिन ढलान से मरीज को निकाला। वहां उतरने की जगह नहीं थी और तेज हवाएं चल रही थीं।”
पोस्ट में कहा गया, “हेलिकॉप्टर से गैर-जरूरी उपकरण हटाकर उसे हल्का किया गया था और उसमें सीमित ईंधन रखा गया था। पायलटों ने बेहद सटीकता, साहस और दृढ़ता के साथ मरीज को निकाला। इसमें एक स्किड को ढलान से टिकाकर हेलिकॉप्टर को उतारने जैसी अहम तकनीक भी शामिल थी।”
फायर एंड फ्यूरी कोर ने बताया कि यह अभियान दिन की आखिरी उपलब्ध लैंडिंग विंडो में किया गया। पोस्ट के अनुसार, यह भारतीय सेना के एविएशन पायलटों की कुशलता, साहस और जीवन बचाने की प्रतिबद्धता को दिखाता है।
