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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने हरदोई में एक ही परिवार के चार लोगों की हत्या के बहुचर्चित मामले में दोषी विनय प्रताप सिंह उर्फ बबलू की आपराधिक अपील खारिज कर दी है। इसके साथ ही, न्यायालय ने निचली अदालत द्वारा सुनाई गई उम्रकैद की सजा को बरकरार रखा है। यह फैसला न्यायमूर्ति राजेश सिंह चौहान और न्यायमूर्ति ए के चौधरी की खंडपीठ ने सुनाया। न्यायालय ने अपने आदेश में कहा कि मामले में मौजूद परिस्थितिजन्य साक्ष्यों की पूरी श्रृंखला बिना किसी संदेह के दर्शाती है कि अभियुक्त ही दोषी है। न्यायालय ने माना कि भले ही कोई प्रत्यक्षदर्शी न हो, लेकिन अभियोजन द्वारा प्रस्तुत परिस्थितिजन्य साक्ष्य इतने मजबूत हैं कि वे आरोपी के अलावा किसी अन्य संभावना को स्वीकार नहीं करते। 2009 में घटी थी घटना न्यायालय ने अपने निर्णय में यह भी कहा कि आरोपी ने स्वयं मृतका बबीता के साथ अपने घनिष्ठ संबंध और उसके घर नियमित रूप से आने-जाने की बात स्वीकार की है। ऐसे में, जिस घर में चार लोगों की हत्या हुई, वहां उसकी मौजूदगी के बावजूद घटना के संबंध में संतोषजनक स्पष्टीकरण न देना उसके खिलाफ एक महत्वपूर्ण परिस्थिति है। अभियोजन के अनुसार, यह घटना हरदोई के संडी थाना क्षेत्र में 24 जून 2009 को हुई थी। नंद्रानी, उनकी बेटी बबीता, नातिन गुंजन और नाती अंशु के शव घर के भीतर मिले थे। चारों की गला घोंटकर हत्या की गई थी। आरोपी और बबीता के बीच लंबे समय से था संबंध जांच में सामने आया था कि आरोपी और बबीता के बीच लंबे समय से संबंध थे तथा घटना से एक रात पहले दोनों के बीच विवाद हुआ था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर उसके कब्जे से मृतकों के आभूषण, मोबाइल फोन और अन्य सामान बरामद करने का दावा किया था। न्यायालय ने कहा कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट, आरोपी और मृतका के संबंध, विवाह को लेकर विवाद, घटना से पहले का झगड़ा, आरोपी का अंतिम बार मृतकों के साथ देखा जाना, घटना के बाद उसका फरार होना तथा उसके पास से मृतकों का सामान बरामद होना—ये सभी परिस्थितियां मिलकर अभियोजन के मामले को पूरी तरह सिद्ध करती हैं। न्यायालय ने हत्या, संपत्ति के दुरुपयोग, एससी-एसटी अधिनियम तथा अन्य धाराओं में दी गई सजा को सही ठहराया।
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हरदोई में हुई चार हत्या मामले में दोषी को उम्रकैद:हाईकोर्ट ने निचली अदालत के फैसले पर मुहर लगाई, साक्ष्य मजबूत