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अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच कनाडा अब यूरोप के करीब जाने की तैयारी में है। यूरोपीय संघ (EU) कनाडा को अपना पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनाने पर काम कर रहा है। एसोसिएट मेंबर के तौर पर कनाडा यूरोपीय संघ के 27 देशों में शामिल नहीं होगा और उसे वोटिंग का अधिकार भी नहीं मिलेगा, लेकिन रक्षा, AI, टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, जरूरी खनिज और व्यापार जैसे मामलों में यूरोपीय संघ के साथ उसका सहयोग बढ़ेगा। इसके साथ ही कनाडा ब्रिटेन और यूक्रेन जैसे EU से बाहर के देशों के साथ यूरोप की सुरक्षा मजबूत करने के लिए एक नई सिक्योरिटी काउंसिल में भी शामिल हो सकता है। कनाडा के प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी
EU कमीशन की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि यूरोपीय संघ कनाडा के लिए अपने दरवाजे खोलना चाहता है। इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी मौजूद थे। कार्नी ने पिछले हफ्ते EU के साथ एक ‘अनोखा गठबंधन’ बनाने की इच्छा जताई थी। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कनाडा और यूरोप दुनिया को एक जैसी नजर से देखते हैं और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं। कनाडा के लिए यूरोपीय संघ को नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी यूरोपीय संघ की मौजूदा संधियों में ‘एसोसिएट मेंबर’ बनने का कोई प्रावधान नहीं है। यानी कनाडा को इस तरह का दर्जा देने के लिए नई व्यवस्था बनानी पड़ सकती है। ऐसा प्रस्ताव इस साल जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने यूक्रेन के लिए दिया था। हालांकि यूक्रेन ने इस विचार को ज्यादा समर्थन नहीं दिया, क्योंकि वह यूरोपीय संघ की पूर्ण सदस्यता चाहता है। उस प्रस्ताव के तहत यूक्रेन को यूरोपीय संघ की बैठकों में शामिल होने और यूरोपीय आयोग में अपना प्रतिनिधि भेजने की अनुमति मिल सकती थी। उसे यूरोपीय संघ के बजट के कुछ हिस्से का लाभ भी मिलता, लेकिन पूर्ण सदस्य देशों की तरह वोटिंग अधिकार नहीं होते। यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच व्यापार बढ़ा अमेरिकी टैरिफ और चीन से बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच यूरोपीय संघ और कनाडा पहले से ही कई क्षेत्रों में सहयोग कर रहे हैं। दोनों के बीच CETA नाम का मुक्त व्यापार समझौता है। इसके तहत दोनों पक्षों के बीच लगभग सभी आयात शुल्क हटा दिए गए हैं। 2016 के बाद से यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच वस्तुओं और सेवाओं का व्यापार 80% से ज्यादा बढ़ा है। इस साल कनाडा EU के एक प्रमुख रक्षा ऋण कार्यक्रम में शामिल होने वाला पहला गैर-EU देश भी बना। वॉन डेर लेयेन ने कहा कि ताकत सिर्फ सबसे शक्तिशाली, अमीर या सबसे ज्यादा आवाज उठाने वाले देशों के पास नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक देशों को यह आजादी होनी चाहिए कि वे तय कर सकें कि उन्हें किसके साथ काम करना है। उन्होंने कहा, “इसलिए हम स्वेच्छा से एक साथ आ रहे हैं।”
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