Yogesh Somvanshi | लखनऊ3 घंटे पहले
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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने पीडिलाइट इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने कंपनी के एम-सील उत्पाद के कथित कम वजन के मामले में लीगल मेट्रोलॉजी विभाग द्वारा वर्ष 2013 में की गई कार्रवाई को निरस्त कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि कंपनी के खिलाफ कार्रवाई से पहले कानून में तय अनिवार्य प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया था।
न्यायमूर्ति आलोक माथुर ने कंपनी की याचिका पर यह आदेश सुनाया। मामला झांसी के एक खुदरा विक्रेता की दुकान पर हुए निरीक्षण से जुड़ा है। विभागीय निरीक्षक ने 25 ग्राम के एम-सील पैक में रेज़िन का वजन शून्य होने का दावा करते हुए कंपनी को नोटिस जारी किया था।
कंपनी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने न्यायालय को बताया कि निरीक्षण लीगल मेट्रोलॉजी (पैकेज्ड कमोडिटी) नियम, 2011 के अनुरूप नहीं किया गया था। उन्होंने यह भी कहा कि नियम 21 के तहत निर्धारित प्रक्रिया का पालन भी नहीं हुआ।
न्यायालय ने अपनी सुनवाई के दौरान महत्वपूर्ण टिप्पणियां कीं। कोर्ट ने कहा कि खुदरा विक्रेता के यहां जांच तभी की जा सकती है, जब पैकेट से छेड़छाड़, रिसाव, शिकायत या अनिवार्य घोषणाओं में कमी जैसी परिस्थितियां मौजूद हों। न्यायालय ने यह भी पाया कि निरीक्षक ने उत्पाद का वजन किस प्रक्रिया से किया, इसका कोई रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं था।
इसके अतिरिक्त, निरीक्षण के दौरान न तो कोई स्वतंत्र गवाह मौजूद था और न ही दुकान मालिक का बयान दर्ज किया गया था। इन परिस्थितियों को देखते हुए न्यायालय ने माना कि वैधानिक प्रक्रिया का पालन किए बिना कंपनी के खिलाफ की गई कार्रवाई कानून के अनुरूप नहीं थी, और इसलिए उसे निरस्त किया जाता है।
