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लखनऊ में 13 साल पुराने आतंकी साजिश मामले में लखनऊ की विशेष एनआईए कोर्ट ने प्रतिबंधित आतंकी संगठन हरकत-उल-जिहाद-अल-इस्लामी (हूजी) के संदिग्ध सदस्य कुरबान अली को दोषी ठहराते हुए 5 साल की कठोर कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने उस पर 7 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। सभी सजाएं एक साथ चलेंगी और जेल में पहले से बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित किया जाएगा। विशेष न्यायाधीश (एनआईए) उमाशंकर जिंदल की अदालत ने गुरुवार को फैसला सुनाते हुए कुरबान अली को आपराधिक साजिश, भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की साजिश, युद्ध के लिए हथियार जुटाने, जालसाजी और आर्म्स एक्ट के मामलों में दोषी करार दिया। इन अपराधों में उसे 5 साल की कठोर कैद और 7 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई। कोर्ट ने धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़े अपराधों में 3 साल की कठोर कैद और 500 रुपए जुर्माने की सजा भी सुनाई। जुर्माना अदा नहीं करने पर अतिरिक्त कारावास भुगतना होगा। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी अदालत ने स्पष्ट किया कि सभी सजाएं समवर्ती (Concurrent) रूप से चलेंगी। यानी आरोपी को अलग-अलग सजाएं क्रमवार नहीं काटनी होंगी। साथ ही न्यायिक हिरासत में पहले से बिताई गई अवधि को सजा में समायोजित करने का आदेश भी दिया गया। लखनऊ जिला जेल भेजने का आदेश दोषसिद्धि के बाद कोर्ट ने सजायाफ्ता वारंट जारी करने के निर्देश दिए और जेल प्रशासन को आदेश दिया कि कुरबान अली को शेष सजा काटने के लिए लखनऊ जिला जेल में रखा जाए। इन धाराओं में ठहराया गया दोषी अदालत ने माना कि अभियोजन पक्ष आरोपों को संदेह से परे साबित करने में सफल रहा। इसके बाद कुरबान अली को भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 120B, 121A, 122, 420, 467, 468 और 471 के तहत दोषी ठहराया गया। इसके अलावा आर्म्स एक्ट की धारा 3, 5, 25, 30 और 35 के तहत भी उसे दोषी पाया गया। यह मामला वर्ष 2013 में दर्ज हूजी से जुड़ी कथित आतंकी साजिश से संबंधित है।
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हूजी के संदिग्ध आतंकी को 5 साल की सजा:2013 की आतंकी साजिश मामले में NIA कोर्ट का फैसला, युद्ध छेड़ने की साजिश समेत कई धाराओं में दोषी