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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने रोटोमैक कंपनी के निदेशकों द्वारा इलाहाबाद बैंक को करोड़ों रुपये की चपत लगाने के मामले में प्रवासी भारतीय राजेश बोथरा को जमानत दे दी है। न्यायालय ने बोथरा को 50-50 लाख रुपये के दो जमानत बांड दाखिल करने और ट्रायल कोर्ट में अपना पासपोर्ट जमा करने सहित कई शर्तें लगाई हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति राजीव सिंह की एकल पीठ ने राजेश बोथरा की जमानत याचिका पर पारित किया। इलाहाबाद बैंक की ओर से यह मामला 19 फरवरी 2020 को दर्ज कराया गया था। बैंक ने आरोप लगाया था कि रोटोमैक कंपनी के निदेशकों ने फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल कर और बिना किसी वास्तविक व्यवसाय के बैंक से करोड़ों रुपये की क्रेडिट लिमिट ली, जिसे बाद में वापस नहीं किया गया। राजेश बोथरा पर आरोप है कि वह भी रोटोमैक के निदेशकों के साथ इस साजिश में शामिल था। उस पर रोटोमैक की नेट वर्थ अच्छी दिखाने के लिए 50 करोड़ रुपये का भुगतान करने का आरोप है। अभियुक्त की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता गौरव मेहरोत्रा ने दलील दी कि उक्त क्रेडिट लिमिट के बदले में अचल संपत्तियाँ भी बंधक थीं। उन्होंने यह भी कहा कि विवेचना के दौरान अभियुक्त ने पूरा सहयोग किया है और मामले में आरोप पत्र दाखिल किया जा चुका है। ऐसे में, केवल ट्रायल पूरा करने के लिए अभियुक्त को जेल में रखना न्यायसंगत नहीं होगा।
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हाईकोर्ट ने प्रवासी भारतीय राजेश बोथरा को दी जमानत:रोटोमैक निदेशकों संग बैंक को करोड़ों की चपत लगाने का मामला