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हरदोई में गंगा, रामगंगा और गर्रा नदी के उफान से हरदोई के कटरी और कटियारी इलाकों में हालात बिगड़ते जा रहे हैं। बैराजों से पानी छोड़े जाने के बाद हजारों लोग बाढ़ से प्रभावित हैं। कई गांवों में सड़कें और रास्ते पानी में डूब चुके हैं। कटान के चलते ग्रामीणों को झोपड़ियों और मकानों के नदी में समा जाने का डर सता रहा है। बिलग्राम तहसील का राइजिंगपुरवा गांव बाढ़ से सबसे ज्यादा प्रभावित इलाकों में है, जहां आने-जाने के लिए नाव और बोट ही सहारा हैं। चारों तरफ पानी, नाव से ही आवाजाही हरदोई शहर से करीब 45 किलोमीटर दूर राइजिंगपुरवा गांव चारों तरफ से बाढ़ के पानी से घिरा है। ग्रामीणों के मुताबिक, पानी बढ़ने के साथ हालात लगातार खराब होते जा रहे हैं। गांव की राम देवी ने बताया कि गंगा के लगातार कटान से ग्रामीण डरे हुए हैं। उनकी झोपड़ियों पर कभी भी नदी में बह जाने का खतरा बना हुआ है। उन्होंने प्रशासन से कटान की समस्या पर ध्यान देने की मांग की। एक महीने से स्कूल नहीं जा रहे बच्चे बाढ़ का असर बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ा है। ग्रामीण दयाराम ने बताया कि पानी भरने के कारण बच्चे करीब एक महीने से स्कूल नहीं जा पा रहे हैं। गांव से करीब दो किलोमीटर दूर स्थित स्कूल तक जाने वाला रास्ता पूरी तरह पानी में डूबा है। झोपड़ियों में घुस रहे सांप और जहरीले कीड़े मक्कूपुरवा गांव के कमल के मुताबिक, पानी बढ़ने के साथ सांप और जहरीले कीड़े झोपड़ियों में घुस रहे हैं। इससे ग्रामीणों में हर समय डर बना रहता है। कई जगह बिजली आपूर्ति बंद होने के कारण रात में खतरा और बढ़ जाता है। सड़कें कटीं, कई गांवों का संपर्क टूटा सवायजपुर और हरपालपुर क्षेत्रों में भी बाढ़ से नुकसान हो रहा है। हरपालपुर में सड़कें कटने के कारण चौधरियापुर-कोला मार्ग समेत कई रास्ते बंद हो गए हैं। इससे दर्जनों गांवों का आपसी संपर्क टूट गया है। किसानों की फसलें पानी में डूब गई हैं। बाढ़ के कारण पशुओं को सड़कों पर बांधकर रखने की मजबूरी है। शेल्टर होम से राहत सामग्री का वितरण बिलग्राम और सवायजपुर तहसील प्रशासन की ओर से राजघाट स्थित शेल्टर होम में राहत सामग्री और भोजन के पैकेट बांटे जा रहे हैं। एसडीएम बिलग्राम एन. राम और एसडीएम सवायजपुर शिवानी सिंह के नेतृत्व में कर्मचारी हरपालपुर, सवायजपुर, बिलग्राम समेत बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में हालात पर नजर रख रहे हैं।
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हरदोई में गंगा के उफान से राइजिंगपुरवा में जिंदगी लाचार:नाव ही एकमात्र सहारा, कटान से मकान बहने का डर, एक महीने से स्कूल नहीं जा पा रहे बच्चे