शाहजहांपुर में सुदामा प्रसाद बाल विद्यास्थली की प्रधानाचार्य बर्खास्त:कमेटी ने गबन का आरोप लगाया, शिक्षकों ने कमेटी पर बंधक बनाने की शिकायत की


शाहजहांपुर में सुदामा प्रसाद बाल विद्यास्थली मंदिर में प्रबंधन कमेटी और प्रधानाचार्य के बीच विवाद गहरा गया है। मंगलवार को कमेटी ने प्रधानाचार्य उज्ज्वला मिश्रा को 25 लाख रुपये के गबन के आरोप में बर्खास्त कर दिया और उनके कार्यालय में ताला लगा दिया। इसके बाद स्कूल के शिक्षकों ने कमेटी पर उन्हें बंधक बनाने का आरोप लगाया, जिसकी सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची। यह मामला रोजा क्षेत्र के रेती रोड स्थित सुदामा प्रसाद बाल विद्यास्थली मंदिर का है, जो एक सोसाइटी द्वारा संचालित होता है। स्कूल के प्रबंधक संजय गुप्ता हैं। कमेटी और प्रधानाचार्य के बीच लंबे समय से विवाद चल रहा है। कमेटी का आरोप है कि प्रधानाचार्य उन्हें स्कूल के अंदर नहीं आने देती थीं और मनमानी करती थीं, जिससे कई अनियमितताएं सामने आईं। मंगलवार को कमेटी के सदस्य स्कूल पहुंचे और प्रधानाचार्य और लिपिक को बर्खास्त करने की कार्रवाई की। इसके बाद शिक्षकों ने कमेटी पर उन्हें बंधक बनाने का आरोप लगाते हुए पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों पक्षों से बातचीत की। बाद में शिक्षक कलेक्ट्रेट पहुंचे और अधिकारियों से कमेटी की शिकायत की। अधिकारियों ने बुधवार को दोनों पक्षों को बैठाकर बातचीत का आश्वासन दिया है। प्रबंधक संजय गुप्ता ने आरोप लगाया कि प्रधानाचार्य पर 25 लाख रुपये के गबन का आरोप है। उन्होंने बताया कि विद्यालय सोसाइटी द्वारा संचालित है और सोसाइटी ने ही प्रधानाचार्य को बर्खास्त किया है। गुप्ता के अनुसार, प्रधानाचार्य ने पिछले दस महीने से अपनी बायोमेट्रिक उपस्थिति दर्ज नहीं कराई है। उन्होंने शिक्षकों को बंधक बनाने के आरोप को गलत बताया। प्रशासनिक अधिकारी वंदना गुप्ता को प्रधानाचार्य का कार्यभार सौंपा गया है। उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल में अनियमितताएं की जा रही थीं। उन्होंने यह भी बताया कि एक बार प्रधानाचार्य ने गमला फेंकने की कोशिश की थी। कमेटी ने सभी पक्षों को सुनने के बाद प्रधानाचार्य को बर्खास्त करने का निर्णय लिया है। यह विवाद फिलहाल कोर्ट में भी विचाराधीन है। वाइस प्रिंसिपल ज्योत्स्ना द्विवेदी ने कहा कि तथाकथित कमेटी के लोग ने आकर गेट पर ताला डाला और कहा कि प्रिंसिपल और एक लिपिक को बर्खास्त किया गया है। प्रबंधक ने अपनी पत्नी को प्रिंसिपल बना दिया है। शैक्षिक कार्य में मानसिक प्रताड़ना देकर बाधा डाली जा रही है। उन्होंने कहा कि जब तक कोर्ट केस न आए तब तक कोई मैनेजमेंट न आने दिया जाए। इससे बच्चों के एडमीशन और शिक्षको के वेतन पर बहुत फर्क पड़ रहा है।

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