‘फेल’ अभ्यर्थी बाद में निकला पास:हाईकोर्ट की दखल से बदला एआईबीई का परिणाम


इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने ऑल इंडिया बार एग्जामिनेशन (एआईबीई-20) में असफल घोषित किए गए एक अभ्यर्थी को राहत दी है। मामले की सुनवाई के दौरान बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) ने स्वीकार किया कि मैनुअल सत्यापन में अभ्यर्थी परीक्षा में उत्तीर्ण पाया गया। इसके बाद न्यायालय ने बीसीआई को मामले पर पुनर्विचार करने का निर्देश दिया। न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने लव यादव की याचिका पर यह आदेश पारित किया। यादव ने अपने परीक्षा परिणाम को चुनौती देते हुए कहा था कि उसे एक तकनीकी त्रुटि के कारण असफल घोषित किया गया था। याचिका में बताया गया कि अभ्यर्थी ने प्रश्न पुस्तिका का सेट कोड ‘डी’ ओएमआर शीट में सही दर्ज किया था, लेकिन उससे संबंधित बबल भरना भूल गया। इस तकनीकी चूक के कारण मशीन ने उत्तर पुस्तिका का मूल्यांकन गलत सेट के आधार पर कर दिया, जिससे उसका परिणाम ‘फेल’ घोषित हो गया। सुनवाई के दौरान, बीसीआई ने न्यायालय को सूचित किया कि उसके निर्देश पर उत्तर पुस्तिका की मैनुअल जांच की गई। जांच में यह पाया गया कि यदि प्रश्न पुस्तिका के सही सेट ‘डी’ के अनुसार मूल्यांकन किया जाता है, तो अभ्यर्थी परीक्षा में सफल है। इस पर न्यायालय ने बीसीआई को मामले पर पुनर्विचार कर आवश्यक निर्णय लेने का निर्देश दिया। न्यायालय ने टिप्पणी की कि एआईबीई परीक्षा अधिवक्ता के रूप में प्रैक्टिस करने के लिए ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ प्राप्त करने की अनिवार्य शर्त है। इसलिए, केवल तकनीकी या मानवीय त्रुटि के कारण किसी अभ्यर्थी के करियर को प्रभावित नहीं किया जा सकता और ऐसे मामलों में न्यायपूर्ण दृष्टिकोण अपनाया जाना चाहिए।

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