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प्रयागराज के झूंसी इलाके के अलग‑अलग हिस्सों में तेंदुए को कई बार देखा गया है। वहीं शनिवार को शास्त्री ब्रिज के नीचे एसटीपी प्लांट के पास एक बार फिर देखा गया। वहां काम करने वाले कर्मचारी ने तेंदुए का भागते हुए वीडियों भी बनाया। मौके पर पहुंची वन विभाग टीम ने सर्च ऑपरेशन चलाया लेकिन तेंदुए पकड़ में नहीं आया। ऐसे में आस पास के एक दर्जन से अधिक गांव में डर का माहौल बना हुआ है। 3 तस्वीरें देखिए CCTV फुटेज में कैद हुआ तेंदुआ स्थानीय लोगों और सीसीटीवी फुटेज के मुताबिक शनिवार की भोर लगभग 4:30 बजे तेंदुआ पहले नागेश्वर गंगा घाट पर देखा गया। देर रात करीब 11:45 बजे हवेलिया वार्ड की संगम विहार कॉलोनी के लक्कड़ बाबा मंदिर के पास उसे देखा गया, जबकि करीब 12:41 बजे शास्त्री पुल के नीचे क्रिया योग संस्थान के समीप भी तेंदुए का दृष्य कैद हुआ। शावकों का वीडियों भी रिकॉर्ड संगम विहार कॉलोनी में तेंदुए का एक वीडियो घर के सीसीटीवी में रिकॉर्ड हुआ है। उसी फुटेज में तेंदुए के पीछे दो छोटे जानवर भी चलते दिखाई दिए । हालांकि वीडियो क्लियर न होने की वजह से शावकों की पुष्टि अभी नहीं हो सकी। शास्त्री पुल के नजदीक बनाए गए वीडियो में तेंदुए के पीछे कुत्ते भी भागते दिखाई दिए। अब पढ़िए लोगों की बातचीत सुदर्शन शरण महाराज बताते हैं कि रात करीब 10:30 बजे आश्रम में तेंदुआ घुसा था। टीन की तेज आवाज होने और गाय के बछड़े के ज़ोर से चिल्लाने पर जब वे दौड़कर पहुंचे, तो तेंदुआ बादाम के पेड़ और नाले की तरफ भाग गया। उन्होंने बताया कि बछड़े, अकेले इंसान और छोटे बच्चे तेंदुए के मुख्य शिकार होते हैं, इसलिए वहां गहरा खतरा और डर बना हुआ है। इसके अलावा, आश्रम और उसके आसपास (जैसे आंबेडकर पार्क और नाला क्षेत्र) में पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था नहीं है। उन्होंने पहले भी लाइट लगवाने का आग्रह किया था ताकि रात में स्थिति स्पष्ट दिख सके। जंगली जानवर का कोई ठिकाना न होने के कारण पूरा डर बना हुआ है। उल्टा किला के पास रहने वाली विजय मनी ने बताया कि वे पहले रोज़ सुबह 4:00 बजे गंगा स्नान के लिए जाती थीं। लेकिन अब जंगली जानवर यानी तेंदुए के डर से वे सुबह जल्दी नहीं जातीं, क्योंकि उन्हें डर है कि वह उन्हें उठाकर न ले जाए। इसी डर के कारण वह सुबह 6:00 बजे चहल-पहल होने के बाद नहाने गईं, ताकि वे सुरक्षित रह सकें। रोहित कुमार निषाद ने कहा कि इलाके में लगातार मौजूदगी के कारण लोगों में भारी दहशत है। डर के मारे लोग शाम 5 से 7 बजे के बीच ही अपने-अपने घरों में कैद हो जाते हैं। लोग खुले में शौच (मैदान) जाने और रात में शिकार या जाल लगाने के लिए बाहर निकलने से कतरा रहे हैं। अकेले बाहर निकलना पूरी तरह बंद हो चुका है और बहुत जरूरी होने पर लोग केवल 5-6 लोगों के समूह में ही बाहर निकलते हैं। शास्त्री पुल के पास रहने वाले दीनानाथ निषाद ने बताया कि वीडियो देखने के बाद पासवान टोला और उल्टा किला क्षेत्र के लोग काफी डरे हुए हैं। इस डर के कारण जो किसान खेतों में नेनुआ, तरोई और लौकी जैसी फसलें बोकर वहीं सोते थे, वे अब अपनी सुरक्षा के लिए नावों पर सोने को मजबूर हैं। नीलगायों से फसलों की रखवाली करने वाले और रात में बाहर निकलने वाले लोग भी घरों में कैद हैं। हालांकि, उन्होंने तेंदुए को अपनी आँखों से प्रत्यक्ष रूप से नहीं देखा है।
नागेश्वर घाट ,नैका महीन के अन्य लोगों ने भी तेंदुए देखने की बात की है। जिन इलाकों में यह देखे गए हैं, वहां के लोग रात में सोने से भी दहशत में हैं। वन विभाग के अनुसार तेंदुए ने छतनाग वार्ड के हरिश्चंद्र शोध संस्थान (एचआरआई) के जंगल से निकलकर झुंसी क्षेत्र की रिहायशी बस्तियों में चहलकदमी तेज कर दी है। वन विभाग की कार्रवाई वन विभाग ने लोगों से घरों के आसपास शोर न करने, बच्चों और पालतू जानवरों को अकेला बाहर न छोड़ने तथा संदिग्ध दिखने वाली हरकत की तुरंत सूचना वन टीम या पुलिस को देने की अपील की है। विभाग की टीम ने इलाके में गश्त बढ़ा दी है और कैमरा‑ट्रैप व आवाज़ देकर तेंदुए को पकड़ने की कोशिश जारी है। स्थानीय पुलिस भी स्थिति पर नजर रखे हुए है और आवश्यक होने पर इलाके को अस्थायी रूप से सील करने का विकल्प अपनाने की चेतावनी दी गई है।
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प्रयागराज में तेंदुए से 12 गांवों में दहशत का माहौल:किसान नाव पर सो रहे, शाम 6 बजे बाद लोग घरों में कैद