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परिवहन विभाग की फेसलेस सेवाओं के बीच ट्रांसपोर्टनगर आरटीओ कार्यालय में वाहन पंजीकरण से जुड़ी गंभीर गड़बड़ी सामने आई है। एक डिलीवरी वैन को टैक्स बचाने के उद्देश्य से सरकारी वाहन के रूप में पंजीकृत कराने की कोशिश की गई, जिसे आरटीओ अधिकारियों ने समय रहते पकड़ लिया। मामले में डीलर की भूमिका भी संदिग्ध मानी जा रही है और जांच के लिए पूरा प्रकरण परिवहन विभाग मुख्यालय भेज दिया गया है। सरकारी वाहन दिखाकर बचाया जा रहा था टैक्स जानकारी के अनुसार ग्रीन सोलरटेक की ओर से टाटा एस डिलीवरी वैन के अस्थायी पंजीकरण के लिए आवेदन किया गया था। आवेदन में वाहन के स्वामित्व (ऑनरशिप टाइप) के कॉलम में “सेंट्रल गवर्नमेंट” दर्ज कर दिया गया था। दस्तावेजों की जांच के दौरान आरटीओ कर्मचारियों ने इस गड़बड़ी को पकड़ लिया और पंजीकरण की प्रक्रिया तत्काल रोक दी। बाद में वाहन का व्यावसायिक श्रेणी में पंजीकरण कराकर नियमानुसार टैक्स जमा कराया गया। डीलर की भूमिका जांच के दायरे में प्रारंभिक जांच में पंजीकरण आवेदन में हुई इस गंभीर त्रुटि को देखते हुए डीलर की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं। आरटीओ ने पूरे मामले की रिपोर्ट परिवहन विभाग मुख्यालय को भेज दी है, जहां आगे की जांच की जाएगी। ऑटो अप्रूवल व्यवस्था पर उठे सवाल केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) ने परिवहन विभाग की करीब 100 सेवाओं को फेसलेस किया है। इसके तहत वाहन पंजीकरण जैसी सेवाओं में ऑटो अप्रूवल व्यवस्था लागू करने की तैयारी है, जिसमें डीलर या आवेदक स्वयं ऑनलाइन प्रक्रिया पूरी कर सकेंगे। हालांकि अधिकारियों का मानना है कि यदि पर्याप्त निगरानी नहीं रही तो इस तरह की गड़बड़ियों और फर्जीवाड़े की आशंका बढ़ सकती है। पहली अगस्त से शुरू होंगे स्मार्ट आरसी कार्ड परिवहन विभाग के अनुसार पहली अगस्त से स्मार्ट आरसी कार्ड जारी किए जाने हैं। इसी वजह से फिलहाल ऑटो अप्रूवल व्यवस्था लागू नहीं की गई है। विभाग का कहना है कि नई व्यवस्था लागू होने से पहले सुरक्षा और सत्यापन प्रक्रिया को और मजबूत किया जाएगा, ताकि फर्जी पंजीकरण जैसी घटनाओं पर रोक लगाई जा सके।
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आरटीओ में फर्जी सरकारी पंजीकरण का खेल पकड़ा गया:डीलर की भूमिका संदिग्ध, मामला परिवहन मुख्यालय भेजा गया