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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने आचार्य नरेंद्र देव कृषि एवं प्रौद्योगिक विश्वविद्यालय, कुमारगंज (अयोध्या) के कुलपति पद पर कृषि वैज्ञानिक डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह की नियुक्ति रद्द करने के राज्य सरकार के आदेश को रद्द कर दिया है। न्यायालय ने डॉ. सिंह को बड़ी राहत देते हुए तत्काल पदभार ग्रहण करने का निर्देश दिया है। कोर्ट की टिप्पणी, नियुक्ति रद्द करने की कार्रवाई मनमानी न्यायमूर्ति आलोक माथुर और न्यायमूर्ति अमिताभ कुमार राय की खंडपीठ ने अपने फैसले में कहा कि नियुक्ति रद्द करने की यह कार्रवाई मनमानी थी और इसे न्यायोचित नहीं ठहराया जा सकता। न्यायालय ने टिप्पणी की कि जब नियुक्ति पत्र में कार्यभार ग्रहण करने की कोई समय-सीमा तय नहीं थी, तब चयनित अभ्यर्थी को पर्याप्त अवसर दिए बिना नियुक्ति समाप्त करना उचित नहीं था। खंडपीठ ने राज्य सरकार और विश्वविद्यालय प्रशासन को निर्देश दिया है कि डॉ. सिंह को तत्काल कुलपति का पदभार ग्रहण करने दिया जाए। मामले के अनुसार, डॉ. ज्ञानेंद्र प्रताप सिंह का चयन विधिवत प्रक्रिया के तहत हुआ था। उन्हें 10 फरवरी 2026 को नियुक्ति पत्र जारी किया गया था। उस समय वह एक केंद्रीय कृषि संस्थान में कार्यरत थे। उन्होंने शासन को सूचित किया था कि वर्तमान दायित्वों से कार्यमुक्त होने में समय लगेगा और इसके लिए 31 मार्च तक का समय मांगा था। एक मार्च तक कार्यभार ग्रहण करने का दिया निर्देश डॉ. सिंह के अनुरोध के बावजूद, शासन ने 25 फरवरी को एक आदेश जारी कर उन्हें एक मार्च तक कार्यभार ग्रहण करने का निर्देश दिया। इसके बाद, तीन मार्च को उनकी नियुक्ति रद्द कर दी गई। इस कार्रवाई को चुनौती देते हुए डॉ. सिंह ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। सुनवाई के दौरान न्यायालय ने पाया कि शासन को पहले से जानकारी थी कि डॉ. सिंह केंद्रीय संस्थान में कार्यरत हैं और उन्हें औपचारिक रूप से कार्यमुक्त होना आवश्यक है। न्यायालय ने यह भी नोट किया कि पूर्व में अन्य कुलपतियों को पदभार ग्रहण करने के लिए कई महीनों का समय दिया गया था। ऐसे में डॉ. सिंह द्वारा मांगा गया अतिरिक्त समय असंगत नहीं था। न्यायालय ने कहा कि प्रशासन का रवैया समान परिस्थितियों में अपनाई गई पूर्व की नीति से मेल नहीं खाता और चयनित उम्मीदवार के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार किया गया। इन टिप्पणियों के साथ न्यायालय ने नियुक्ति निरस्त करने से जुड़े दोनों आदेशों को रद्द कर डॉ. सिंह की बहाली का रास्ता साफ कर दिया।
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कुलपति डॉ. ज्ञानेंद्र सिंह की नियुक्ति-रद्द करने का आदेश निरस्त:लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार के फैसले को मनमाना बताया, तत्काल पदभार ग्रहण करने के निर्देश