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बरेली के फतेहगंज पूर्वी में शुक्रवार सुबह 7 बजे प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने राम मंदिर में हो रहे चढ़ावा चोरी के प्रकरण पर बेहद गंभीर और तीखे आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि राम मंदिर की जो भव्य इमारत आस्था की नींव पर खड़ी की गई थी, वह अब नैतिक रूप से ढह गई है। इस पूरी व्यवस्था के लिए उन्होंने सीधे तौर पर प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) को जिम्मेदार ठहराया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि राम मंदिर ट्रस्ट का गठन पीएमओ द्वारा ही किया गया था और वहीं से पूरा संचालन होता है, इसलिए भ्रष्टाचार की जिम्मेदारी भी उसी कार्यालय की है। उन्होंने सवाल उठाया कि जब कोष ही सुरक्षित नहीं है और कोष का अध्यक्ष (कोषाध्यक्ष) गायब है, तो जिम्मेदारी किसकी है? शंकराचार्य ने कहा कि मंदिर प्रबंधन में जो लोग चंपत राय जैसे कार्यभार संभाले हुए हैं, वे केवल कठपुतली हैं और वास्तविक शक्ति किसी और के हाथ में है। योगी आदित्यनाथ पर प्रहार: गेरुआ वेश में पशु कटान के लाइसेंस
शंकराचार्य ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लेते हुए कहा कि वे असली संत नहीं हैं। उन्होंने कहा कि जो योगी गेरुआ वस्त्र धारण करता है, वह अहिंसा का प्रतीक होना चाहिए, लेकिन उत्तर प्रदेश में गेरुआ वेश पहनकर पशुओं के कटान के लाइसेंस दिए जा रहे हैं और करोड़ों पशुओं की हत्या हो रही है। उन्होंने कहा कि सनातनी धर्म में गाय को राष्ट्रमाता माना गया है, लेकिन सत्ता में आने के बाद ये लोग गाय की हत्या करवा रहे हैं। इतिहास की चेतावनी: सत्ता का अहंकार और संतों का अपमान
शंकराचार्य ने एक पुरानी घटना का जिक्र करते हुए अखिलेश यादव की सरकार पर तंज कसा और कहा कि जिस सरकार ने संतों पर लाठियां चलवाई थीं, उसका अंत हो गया। उन्होंने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि अब योगी सरकार भी उसी राह पर है, जहाँ संतों को चोटी पकड़कर पिटवाया जा रहा है। उन्होंने साफ कहा कि संतों के अपमान का परिणाम सत्ता का पतन होता है और योगी सरकार का जाना भी अब तय है। असली-नकली का भेद और जनता का संकल्प
उन्होंने देश की बड़ी राजनीतिक पार्टियों, जिनमें कांग्रेस, समाजवादी पार्टी और बीजेपी शामिल हैं, पर कटाक्ष करते हुए कहा कि तीनों ही पार्टियों पर संतों और गौ हत्या के आरोप रहे हैं। उन्होंने जनता से आग्रह किया कि आगामी विधानसभा चुनाव में किसी भी ऐसी पार्टी को वोट न दें जो भ्रष्ट हो। उन्होंने कहा कि ‘एक वोट और एक नोट’ का मंत्र गौ रक्षा के लिए अपनाएं। शंकराचार्य ने इस बात पर जोर दिया कि गौ रक्षा कानून को बीजेपी ने ही हटाया है और जनता को भ्रमित कर रखा है। उन्होंने अपनी यात्रा के उद्देश्य को स्पष्ट करते हुए कहा कि वे किसी पार्टी को नहीं जिता रहे, बल्कि समाज को यह बता रहे हैं कि जो दल गौ रक्षा का संकल्प ले, उसी को चुनना चाहिए। उन्होंने कहा कि वर्तमान में जो दल सत्ता में हैं, उन्होंने संतों को केवल औजार की तरह इस्तेमाल किया है और उनकी हकीकत अब सामने आ गई है।
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आस्था की नींव पर बना राम मंदिर अब ढह गया:बरेली में बोले शंकराचार्य- राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के लिए पीएमओ कार्यालय जिम्मेदार