UP Panchayat Election Case: Allahabad HC Hears UP Govt Reply

इलाहाबाद हाईकोर्ट में पंचायत चुनाव को लेकर सुनवाई होगी। इससे पहले 8 अप्रैल को सुनवाई टल गई थी। अब आज गुरुवार को हाईकोर्ट की सुनवाई लिस्टिंग में यह मामला आ गया है। लंच बाद मामले की सुनवाई की जाएगी। हाईकोर्ट के जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ न

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17 मार्च को याचिका दाखिल होने के बाद हाईकोर्ट ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से जवाब मांगा था। पूछा था कि समयसीमा पर चुनाव क्यों नहीं हो सकते। 17 मार्च के बाद मामले की सुनवाई 25 मार्च को होनी थी लेकिन किन्हीं कारणों सुनवाई टल गई थी।

पहले जानिये 17 मार्च को हाईकोर्ट ने क्या कहा था

‘पंचायत चुनाव समय सीमा के भीतर चुनाव क्यों नहीं करवाए जा रहे हैं? संवैधानिक समयसीमा के भीतर चुनाव प्रक्रिया पूरी कर पाएंगे या नहीं?’

यह सवाल इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा था। कोर्ट ने ग्राम पंचायत चुनाव- 2026 को लेकर आयोग से चुनाव की तैयारियों की स्थिति साफ करने को कहा है।

दरअसल, यूपी में पंचायत चुनाव टाले जाने का मामला इलाहाबाद हाईकोर्ट में है। 17 मार्च को याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन की ओर से दाखिल याचिका पर सुनवाई हुई। इसमें मांग की गई है कि जिला पंचायत का कार्यकाल समाप्त होने से पहले पंचायत चुनाव की पूरी प्रक्रिया के लिए विस्तृत और समयबद्ध कार्यक्रम कोर्ट के सामने पेश किया जाए।

मामले की सुनवाई जस्टिस अतुल श्रीधरन और जस्टिस सिद्धार्थ नंदन की डिवीजन बेंच ने की।

पंचायत चुनाव अप्रैल से जून 2026 तक होना प्रस्तावित है।

पंचायत चुनाव अप्रैल से जून 2026 तक होना प्रस्तावित है।

राज्य सरकार की जिम्मेदारी बताई याचिकाकर्ता इम्तियाज हुसैन ने कोर्ट में दलील दी कि संविधान के अनुच्छेद 243E के अनुसार पंचायत का कार्यकाल उसकी पहली बैठक की तारीख से अधिकतम 5 साल तक ही हो सकता है, इससे ज्यादा नहीं। इसलिए समय पर चुनाव कराना जरूरी है।

वहीं, राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से दलील दी गई कि यूपी पंचायत राज अधिनियम 1947 की धारा 12-BB के अनुसार प्रधान के सामान्य चुनाव या उपचुनाव की तिथि तय करने की अधिसूचना जारी करना राज्य सरकार का दायित्व है। यह अधिसूचना राज्य निर्वाचन आयोग के परामर्श से जारी की जाती है।

आयोग से मांगी गई सफाई सभी पक्षों को सुनने के बाद हाकोर्ट ने राज्य निर्वाचन आयोग से पूछा है कि 19 फरवरी, 2026 की मौजूदा अधिसूचना के हिसाब से क्या वह पंचायत चुनाव कराने की स्थिति में है? कोर्ट ने यह भी कहा कि पंचायत चुनाव 26 मई, 2026 तक या उससे पहले संपन्न हो जाने चाहिए।

2 मई को खत्म हो जाएगा कार्यकाल यूपी में पंचायत चुनाव 2021 में हुए थे। इस आधार पर ग्राम प्रधानों, ग्राम पंचायत सदस्यों, क्षेत्र पंचायत सदस्य और जिला पंचायत सदस्यों का कार्यकाल 2 मई को खत्म हो जाएगा। यही वजह है कि पंचायत चुनाव अप्रैल से जून 2026 तक होना प्रस्तावित है।

पंचायत चुनाव में देरी की दो वजहें…

पंचायत चुनाव के लिए मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) का काम भी 27 मार्च को पूरा होगा। इसी दिन मतदाता सूचियों का अंतिम प्रकाशन किया जाएगा। सरकार और राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से अप्रैल-मई में ही पंचायत चुनाव कराने की तैयारी थी। लेकिन अब प्रदेश का बड़ा प्रशासनिक, शिक्षक और कर्मचारी अमला जनगणना के लिए हाउस लिस्टिंग के कार्य में जुटेगा।

भाजपा के सूत्रों के मुताबिक, सितंबर तक हाउस लिस्टिंग का काम चलेगा। उससे पहले पार्टी की ओर से विधानसभा चुनाव 2027 की तैयारी शुरू कर दी जाएगी। ऐसे में सपा समेत सभी राजनीतिक दल भी सितंबर के बाद पंचायत चुनाव कराने के पक्ष में नहीं हैं।

सरकार और संगठन भी नहीं चाहते समय पर चुनाव हों भाजपा के सूत्रों का कहना है कि पार्टी और सरकार भी समय पर चुनाव कराने के पक्ष में नहीं है। विधानसभा चुनाव से पहले पंचायत चुनाव में कई तरह के राजनीतिक जोखिम हैं। पहला तो गांवों में पार्टी के ही कार्यकर्ताओं के बीच राजनीतिक रंजिश बढ़ जाएगी। दूसरा प्रत्याशी चयन नहीं होने से नाराज पार्टी के कार्यकर्ता दूसरे दलों से टिकट लेकर पार्टी को कमजोर कर सकते हैं।

जिला पंचायत सदस्य और क्षेत्र पंचायत सदस्य के चुनाव में यदि पार्टी का प्रदर्शन अच्छा नहीं रहता, तो इसका सीधा असर विधानसभा चुनाव पर भी पड़ेगा। 2021 में भी पंचायत चुनाव के पहले चरण का अनुभव योगी सरकार और भाजपा के लिए अच्छा नहीं था। उसका डैमेज कंट्रोल करने में काफी मशक्कत करनी पड़ी थी।

पंचायतराज विभाग की तैयारी नहीं राज्य निर्वाचन आयोग की ओर से पंचायतीराज विभाग को पत्र लिखा था कि पंचायत चुनाव के लिए आरक्षण निर्धारण कर सूची सौंपी जाए। आरक्षण का निर्धारण करने के लिए पंचायती राज विभाग को एक कमेटी बनानी है। कमेटी ही 2021 और 2015 के पंचायत आरक्षण के आधार पर 2026 के लिए आरक्षण निर्धारित करेगी।

आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया में करीब 2 महीने का समय लगता है, लेकिन विभाग की ओर से अब तक कमेटी का गठन करने की कवायद भी शुरू नहीं की गई है। विभाग के उच्च पदस्थ अधिकारी ने भी संकेत दिए हैं कि पंचायत चुनाव की फिलहाल कोई तैयारी नहीं है। सरकार में भी उच्च स्तर से इसके लिए कोई संकेत नहीं मिला है।

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