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बेंगलुरु/नागपुर1 मिनट पहले
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RSS प्रमुख मोहन भागवत ने संघ के रजिस्ट्रेशन की मांग को खारिज करते हुए कहा कि संगठन न तो गुप्त है और न ही जनता की नजर से दूर काम करता है।
भागवत ने कहा- बहुत सी ऐसी चीजें चल रही हैं जिनका रजिस्ट्रेशन नहीं है। संगठन के पास छिपाने के लिए कुछ नहीं है। हम खुले मैदानों में काम करते हैं। लोगों को बुलाते हैं और उन्हें बताते हैं कि हम क्या करते हैं।
उन्होंने संघ के रजिस्ट्रेशन के सवाल पर बताया कि जो लोग सरकार से फंड चाहते हैं, उन्हें रजिस्ट्रेशन की जरूरत होती है। वह होना ही चाहिए। लेकिन सरकार जानती है कि संघ का अस्तित्व है।
दरअसल कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने RSS के 100 साल पूरे होने पर मोहन भागवत को लेटर लिखा था। खड़गे ने पूछा था- 100 साल का हिसाब बताएं। कानूनी दर्जा, फंडिंग और खर्च का पूरा ब्योरा सार्वजनिक करें।

भागवत ने और क्या कहा, 5 पॉइंट…
- सरकार ने हम पर दो बार प्रतिबंध लगाया। एक प्रतिबंध कोर्ट के आदेश से लगा था। दूसरा सत्याग्रह के बाद हटाया गया। इसका मतलब है कि सरकार जानती थी कि RSS का अस्तित्व है।
- संगठन ने 1950 में सरकार को अपना लिखित संविधान सौंपा था और किसी भी अधिकारी ने कभी भी मान्यता मिलने से पहले रजिस्ट्रेशन कराने पर जोर नहीं दिया।
- 100 से ज्यादा साल बीत गए हैं। किसी ने हमसे यह नहीं कहा कि आपको रजिस्ट्रेशन कराना ही होगा। हिंदू धर्म रजिस्टर्ड नहीं है। कई चीजें रजिस्टर्ड नहीं हैं।
- हमारे कार्यकर्ता हर इलाके में रहते हैं। लोग उन्हें रोज देखते हैं। हमारी पहुंच बहुत व्यापक है। अगर हम कोई बात छिपाकर रखते, तो इनमें से कुछ भी मुमकिन नहीं होता
- वे किसी न किसी तरह से एक तरफ तो संघ के काम में बाधा डालना चाहते हैं और लोगों के मन में शक पैदा करना चाहते हैं। लेकिन अब ऐसा करना मुमकिन नहीं है क्योंकि लोग हमें जानते हैं।
खड़गे ने पूछा था- RSS 100 साल का हिसाब बताए
कर्नाटक के गृह मंत्री प्रियांक खड़गे ने सोमवार को RSS के 100 साल पूरे होने पर बधाई देते हुए, मोहन भागवत को लेटर लिखकर संघ की कानूनी स्थिति पर स्पष्टीकरण मांगा है। खड़गे ने RSS से कहा कि वह अपना रजिस्ट्रेशन कराए। अपनी कानूनी स्थिति स्पष्ट करे और फंडिंग, आय, खर्च और संपत्ति के स्रोतों की जानकारी सार्वजनिक करे।
उन्होंने तर्क दिया कि संगठन को पारदर्शिता और संवैधानिक जवाबदेही बनाए रखनी चाहिए। 13 जून को लिखे लेटर में प्रियांक ने सवाल किया कि जब नागरिकों, मजदूर संगठनों, NGO, ट्रस्ट, मंदिरों और कंपनियों से कानून का पालन करने, रजिस्ट्रेशन कराने और जानकारी देने की उम्मीद की जाती है, तो RSS को इससे छूट क्यों मिलनी चाहिए।
