वॉशिंगटन डीसी/तेहरान12 मिनट पहले
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने ईरान के साथ हुए समझौते की आलोचना कर रहे इजराइली नेताओं पर निशाना साधा है। उन्होंने कहा कि जो लोग इस डील का विरोध कर रहे हैं, उन्हें जमीनी हकीकत को समझना चाहिए।
पत्रकारों से बातचीत में वेंस ने कहा कि अगर वह प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सरकार का हिस्सा होते, तो दुनिया में अपने सबसे बड़े और ताकतवर सहयोगी अमेरिका पर इस तरह सवाल नहीं उठाते।
वेंस ने कहा, “इस समय पूरी दुनिया में डोनाल्ड ट्रम्प ही ऐसे नेता हैं जो इजराइल के प्रति सबसे ज्यादा सहानुभूति रखते हैं।”
उन्होंने इजराइल के राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री इतामार बेन ग्विर और वित्त मंत्री बेजालेल स्मोट्रिच की आलोचना करते हुए कहा कि सिर्फ सैन्य कार्रवाई से हर समस्या का समाधान नहीं निकाला जा सकता।
वेंस ने सवाल उठाया, “आपके पास दूसरा विकल्प क्या है? इजराइल सिर्फ 90 लाख आबादी वाला देश है। हर समस्या का हल लोगों को मारकर नहीं निकाला जा सकता।”

पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
1. ईरान-अमेरिका पीस डील लागू: अमेरिका और ईरान के बीच जंग खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते पर दस्तखत हो गए हैं। डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार रात को फ्रांस के वर्साय पैलेस में इससे जुड़े MoU पर साइन किए।
2. अमेरिका-ईरान प्रतिनिधि आज स्विट्जरलैंड में मिलेंगे: अमेरिका और ईरान के बीच युद्धविराम समझौते पर हस्ताक्षर होने के बाद दोनों देशों के बीच पहली औपचारिक वार्ता शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बर्गेनस्टॉक रिजॉर्ट में होगी।
3. इजराइल बोला- लेबनान से पीछे नहीं हटेंगे: इजराइली सेना (IDF) ने दक्षिणी लेबनान में अपनी तैनाती का नया नक्शा जारी किया है और साफ किया है कि फिलहाल वहां से सैनिक नहीं हटाए जाएंगे।
4. होर्मुज से जहाजों की आवाजाही तेज: पीस डील पर साइन होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की आवाजाही तेज हो गई है। सऊदी अरब के झंडे वाले तीन बड़े तेल टैंकर होर्मुज स्ट्रेट से गुजर चुके हैं।
5. लेबनान में इजराइली हमलों में 3 लोगों की मौत: पीस डील लागू होने के बाद भी इजराइल ने साउथ लेबनान में हमला किया जिसमें तीन लोगों की मौत हो गई। 2 मार्च से अब तक इन हमलों में 3,900 लोग मारे जा चुके हैं।
अमेरिका-ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
12 मिनट पहले
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स्विट्जरलैंड ने वेंस की यात्रा रद्द होने की पुष्टि की
स्विट्जरलैंड के विदेश मंत्रालय ने कहा है कि अमेरिका और ईरान के बीच शुक्रवार को स्विट्जरलैंड के बुर्गेनस्टॉक रिसॉर्ट में होने वाली बातचीत अब नहीं होगी।
यह घोषणा ऐसे समय हुई है जब कुछ घंटे पहले ही व्हाइट हाउस ने बताया था कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है।
वेंस को ईरानी वार्ताकारों से मुलाकात कर अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (एमओयू) को लागू करने के तौर-तरीकों पर बातचीत शुरू करनी थी।
अब बातचीत रद्द होने और वेंस की यात्रा टलने से यह साफ हो गया है कि दोनों देशों के बीच अगले दौर की बातचीत फिलहाल आगे नहीं बढ़ पाएगी।
29 मिनट पहले
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ईरान के साथ समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल

अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया।
इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
48 मिनट पहले
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अमेरिका-ईरान समझौते के बाद अगले 60 दिनों में इन 5 बातों पर नजर रहेगी

04:32 AM19 जून 2026
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रिपोर्ट: वेंस के स्विट्जलैंड दौरा टलने की वजह लेबनान
एक्सियोस के पत्रकार बराक रविद ने एक अमेरिकी अधिकारी के हवाले से बताया कि अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस की स्विट्जरलैंड यात्रा टलने के पीछे लेबनान को लेकर ईरान की मांगें वजह हो सकती हैं।
यह देरी ऐसे समय हुई है जब अमेरिका और ईरान तीन महीने से जारी युद्ध को खत्म करने के लिए हुए अंतरिम समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद अगले दौर की बातचीत की तैयारी कर रहे हैं।
इस समझौते में सभी मोर्चों पर लड़ाई खत्म करने की बात कही गई है। इसमें लेबनान में जारी जंग भी शामिल है।
हालांकि अमेरिका और ईरान के बीच अभी इस बात पर मतभेद हैं कि समझौते की इस शर्त को कैसे समझा जाए और जमीन पर कैसे लागू किया जाए।
गुरुवार को वेंस ने इजराइल सरकार के कुछ मंत्रियों की कड़ी आलोचना की थी। वेंस का बयान दिखाता है कि ईरान समझौते और लेबनान में इजराइली कार्रवाई को लेकर अमेरिका और इजराइल के बीच तनाव बढ़ रहा है।
04:17 AM19 जून 2026
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पीस डील से ट्रम्प की पार्टी के नेताओं में नाराजगी बढ़ी
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, जब अमेरिकी संसद में रिपब्लिकन पार्टी के बड़े नेताओं को पहली बार ट्रम्प और ईरान के बीच हुए समझौते की पूरी जानकारी मिली तो कुछ नेता हैरान रह गए। उन्होंने इस पर तुरंत कोई प्रतिक्रिया देने से भी इनकार कर दिया।
अब कई रिपब्लिकन सीनेटर इस समझौते पर खुलकर सवाल उठा रहे हैं। उनका कहना है कि ट्रम्प को ईरान को लेकर अपनी रणनीति बदलनी चाहिए।
कुछ रिपब्लिकन नेता इस समझौते की कड़ी आलोचना कर रहे हैं। इनमें वे नेता भी शामिल हैं जिन्हें अब दोबारा चुनाव नहीं लड़ना है।
लुइसियाना के रिपब्लिकन सीनेटर बिल कैसिडी ने कहा, “इस समझौते के बाद ईरान ज्यादा मजबूत हो गया है और अमेरिका कमजोर हुआ है।”
04:03 AM19 जून 2026
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अमेरिका-ईरान के बीच हुए समझौते के 14 पॉइंट्स

03:45 AM19 जून 2026
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नाकाबंदी हटने के बाद होर्मुज से फिर गुजरने लगे तेल टैंकर, कीमतों में गिरावट
अमेरिका की तरफ से गुरुवार को ईरान पर लगी नौसैनिक नाकाबंदी हटाने के बाद तेल टैंकरों ने फिर से होर्मुज से गुजरना शुरू कर दिया है।
इसका असर तेल बाजार पर भी दिखाई दिया और कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट आई। शुक्रवार को ब्रेंट क्रूड की कीमत 1% गिरकर 79.03 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई। पूरे सप्ताह में ब्रेंट क्रूड करीब 9.5% नीचे आ चुका है।
कीमतों में यह गिरावट इस भरोसे की वजह से आई है कि खाड़ी देशों से होने वाली तेल आपूर्ति में अब बड़ा संकट आने की आशंका कम हो गई है।
03:29 AM19 जून 2026
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पीस डील और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प से जुड़े 6 कार्टून






03:14 AM19 जून 2026
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ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़े विवाद को जानिए

ईरान का परमाणु कार्यक्रम कई दशकों से अंतरराष्ट्रीय राजनीति का बड़ा मुद्दा रहा है। ईरान लगातार दावा करता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह शांतिपूर्ण है। लेकिन अमेरिका और इजराइल इस दावे को नहीं मानते। उनका कहना है कि ईरान परमाणु हथियार बनाने की कोशिश कर रहा है।
2015 का परमाणु समझौता क्या था?
2015 में हुए परमाणु समझौते के तहत ईरान ने यूरेनियम संवर्धन (एनरिचमेंट) का स्तर 3.67% तक सीमित रखने पर सहमति दी थी।
3.67% संवर्धित यूरेनियम का इस्तेमाल परमाणु बिजलीघरों के ईंधन के रूप में किया जा सकता है।
परमाणु हथियार बनाने के लिए आमतौर पर 90% या उससे अधिक संवर्धित यूरेनियम की जरूरत होती है।
ट्रम्प के फैसले के बाद क्या बदला?
2018 में ट्रम्प ने अमेरिका को 2015 के परमाणु समझौते से बाहर निकाल लिया।
इसके बाद ईरान ने धीरे-धीरे यूरेनियम संवर्धन का स्तर बढ़ाना शुरू कर दिया।
ईरान ने खुले तौर पर 3.67% की सीमा से ऊपर जाना शुरू किया।
ईरान कितनी दूर पहुंच गया था?
अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के मुताबिक जून 2025 तक ईरान 60% तक यूरेनियम संवर्धन कर रहा था।
उसके पास 60% संवर्धित यूरेनियम का करीब 400 किलोग्राम भंडार था।
यह स्तर परमाणु हथियार के लिए जरूरी 90% से नीचे है, लेकिन नागरिक उपयोग के लिए जरूरी स्तर से काफी ज्यादा है।
03:03 AM19 जून 2026
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सुप्रीम लीडर बोले- अमेरिका पर भरोसा नहीं था, पजशकियान ने मनाया

ईरान के सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई ने कहा है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते को लेकर उनकी सोच अलग थी, लेकिन राष्ट्रपति पजशकियान के कहने पर उन्होंने इसे मंजूरी दे दी।
अपने मैसेज में खामेनेई ने कहा,
मैं इस समझौते के पक्ष में नहीं था, लेकिन राष्ट्रपति ने भरोसा दिलाया कि वे ईरान और उसकी जनता के हितों की रक्षा करेंगे। इसलिए मैंने इसकी इजाजत दी।”

उन्होंने यह भी बताया कि पजशकियान ने उनसे कहा था कि अगर अमेरिका बातचीत के दौरान ज्यादा शर्तें रखने की कोशिश करेगा, तो ईरान उन्हें नहीं मानेगा।
खामेनेई ने कहा, “अब हमें इंतजार है कि समझौते की शर्तों को कैसे लागू किया जाता है और अमेरिका अपने वादे पूरे करता है या नहीं।”
यह पहली बार है जब मोजतबा खामेनेई ने अमेरिका-ईरान समझौते पर सार्वजनिक रूप से कोई प्रतिक्रिया दी है। मार्च में सुप्रीम लीडर बनने के बाद भी वह बहुत कम सार्वजनिक रूप से सामने आए हैं।
02:44 AM19 जून 2026
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मिडिल ईस्ट में 3 महीने से ज्यादा समय तक चले जंग का हासिल

02:27 AM19 जून 2026
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ट्रम्प का दावा- ईरान ने लगभग बिना शर्त आत्मसमर्पण किया
ट्रम्प ने कहा कि ईरान के साथ हुआ समझौता लगभग बिना शर्त आत्मसमर्पण जैसा है। उन्होंने दावा किया कि युद्ध में अमेरिका ने ईरान को पूरी तरह झुका दिया और इससे उनकी ताकत भी दुनिया के सामने दिखी।
एक्सियोस के एक पत्रकार ने ट्रम्प को उनका पुराना बयान याद दिलाया था, जिसमें उन्होंने कहा था कि वे चाहते हैं कि ईरान बिना शर्ता के सरेंडर कर दे। इस पर ट्रम्प ने जवाब देते हुए कहा कि ईरान ने असल में वैसा ही सरेंडर किया है।
02:01 AM19 जून 2026
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति की स्विट्जरलैंड यात्रा रद्द

अमेरिकी राष्ट्रपति जेडी वेंस ईरानी डेलिगेशन से बातचीत के लिए 19 जून को स्विट्जरलैंड जाने वाले थे।
अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने स्विट्जरलैंड की अपनी प्रस्तावित यात्रा रद्द कर दी है। इससे ईरान के साथ हाल ही में हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के तहत शुरू होने वाली अगली चरण की बातचीत के समय को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।
वेंस को शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में ईरानी टीम से बातचीत के लिए जाना था। लेकिन अब उनकी यात्रा टल गई है क्योंकि अमेरिका और ईरान के बीच होने वाली तकनीकी बातचीत के फ्रेमवर्क पर अभी काम चल रहा है।
01:46 AM19 जून 2026
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पीस डील लागू होने के बाद ईरान को हुए अहम फायदे

01:31 AM19 जून 2026
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अमेरिका ने ईरान पर लगी नौसैनिक नाकेबंदी हटाई

पीस डील पर दस्तखत होने के कुछ घंटे बाद अमेरिका ने ईरान पर लगाई गई अपनी नौसैनिक नाकाबंदी हटा ली है। अमेरिकी सरकार ने कहा कि अब अमेरिकी सेना ईरान के बंदरगाहों की ओर जाने या वहां से निकलने वाले जहाजों की आवाजाही में कोई बाधा नहीं डालेगी। नाकेबंदी लागू कराने से जुड़ी सभी सैन्य कार्रवाइयां भी रोक दी गई हैं।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड (सेंटकॉम) ने एक्स पर इस फैसले की जानकारी देते हुए यह भी कहा कि अमेरिकी नौसेना के युद्धपोत क्षेत्र में मौजूद रहेंगे। उनका काम यह देखना होगा कि अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौते की सभी शर्तों का पालन हो रहा है या नहीं।
01:26 AM19 जून 2026
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ईरानी संसद के स्पीकर बोले- अमेरिका ने बेईमानी की तो करारा जवाब देंगे

ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने कहा है कि अगर अमेरिका समझौते की शर्तों का उल्लंघन करता है, तो ईरान इसे बर्दाश्त नहीं करेगा।
गालिबाफ ने सोशल मीडिया पर लिखा,
अगर दूसरा पक्ष बेईमानी करता है, समझौता तोड़ता है या जरूरत से ज्यादा मांगें रखता है, तो हम दुश्मन को करारा जवाब देने में कोई हिचकिचाहट नहीं दिखाएंगे।

उन्होंने कहा कि अमेरिका को युद्ध के दौरान एक बार जवाब मिल चुका है। अगर वे फिर वही रास्ता अपनाते हैं, तो उन्हें उससे भी कड़ा जवाब मिलेगा।
01:15 AM19 जून 2026
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ईरान डील पर अमेरिका में सवाल, ट्रम्प जंग से क्यों पीछे हटे
डोनाल्ड ट्रम्प के ईरान के साथ किए गए समझौते पर अमेरिका में सवाल उठ रहे हैं। कई रिपब्लिकन नेता पूछ रहे हैं कि ट्रम्प आखिर युद्ध से पीछे क्यों हटे। पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस समेत कई नेताओं ने इस समझौते को सरेंडर जैसा बताया है।
पूर्व उपराष्ट्रपति माइक पेंस ने CNN से कहा कि यह समझौता तुष्टीकरण जैसा है। कुछ रिपब्लिकन नेताओं का मानना है कि इससे अमेरिका का दबाव कमजोर होगा और दूसरे विरोधी देशों को भी संदेश जाएगा कि आर्थिक दबाव डालकर वॉशिंगटन को झुकाया जा सकता है।
CNN के मुताबिक, प्रतिबंधों में ढील से ईरान को अरबों डॉलर की राहत मिल सकती है। इससे अमेरिका की सौदेबाजी की ताकत घटेगी।
