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सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में एक व्यक्ति के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी का मामला रद्द कर दिया है। उस पर अपनी स्कूटी की पिछली नंबर प्लेट को काले मास्क से ढकने का आरोप था। जस्टिस संजय करोल और जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने कहा कि पुलिस की यह आशंका कि नंबर प्लेट चालान से बचने के लिए छिपाई गई थी, केवल एक अनुमान है। धोखाधड़ी का मामला नहीं बनता कोर्ट ने स्पष्ट किया कि नंबर प्लेट छिपाना मोटर व्हीकल एक्ट (MV Act) के तहत जुर्माना लगाने का आधार हो सकता है, लेकिन इसे आईपीसी की धारा 420 के तहत धोखाधड़ी का अपराध नहीं माना जा सकता। बेंच ने कहा कि धोखाधड़ी के लिए बेईमानी की नीयत, किसी को प्रेरित करना और संपत्ति का नुकसान जैसे जरूरी तत्व होने चाहिए, जो इस मामले में नहीं हैं। क्या था पूरा मामला? याचिकाकर्ता मोहम्मद अब्दुल अहद शाकेर अपनी होंडा एक्टिवा चला रहे थे, जिसकी पिछली नंबर प्लेट पर काला मास्क लगा था। पेट्रोलिंग पर तैनात पुलिसकर्मी ने उन्हें रोका और उन पर चालान से बचने के लिए पुलिस को धोखा देने का आरोप लगाते हुए आईपीसी की धारा 420 और एमवी एक्ट की धारा 80(ए) के तहत एफआईआर दर्ज की। इसके बाद चार्जशीट दाखिल हुई और मजिस्ट्रेट ने संज्ञान लिया। तेलंगाना हाईकोर्ट से मिली थी निराशा याचिकाकर्ता ने एफआईआर रद्द करने के लिए तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी, जिसे हाईकोर्ट ने यह कहते हुए खारिज कर दिया था कि प्रथम दृष्टया मामला बनता है। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। सामने की प्लेट थी खुली सुप्रीम कोर्ट ने गौर किया कि केवल पिछली नंबर प्लेट ढकी थी, जबकि सामने की प्लेट साफ और पढ़ने योग्य थी। कोर्ट ने कहा कि यह किसी योजना के तहत पहचान छिपाने जैसा नहीं लगता। कोर्ट ने माना कि कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा। एमवी एक्ट के तहत जुर्माना भरना होगा सुप्रीम कोर्ट ने धोखाधड़ी का केस तो रद्द कर दिया, लेकिन स्पष्ट किया कि मोटर व्हीकल एक्ट के तहत याचिकाकर्ता की जिम्मेदारी बनी रहेगी। कोर्ट ने निर्देश दिया कि याचिकाकर्ता एमवी एक्ट की धारा 177 के तहत जुर्माना संबंधित अथॉरिटी के पास एक महीने के भीतर जमा करे, यदि पहले नहीं किया गया है।
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गाड़ी की नंबर प्लेट छिपाना धोखाधड़ी नहीं:सुप्रीम कोर्ट ने कहा- यह मोटर व्हीकल एक्ट का उल्लंघन है, लेकिन क्रिमिनल केस नहीं माना जा सकता