नई दिल्ली2 मिनट पहले
- कॉपी लिंक

देश में खुदरा महंगाई की रफ्तार फिर बढ़ गई है। जून में ये बढ़कर 4.38% पर पहुंच गई है, जो मई में 3.93% पर थी। 6 महीनों में यह पहली बार है जब खुदरा महंगाई रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के टारगेट 4% के पार निकली है।
2026 की शुरुआत में महंगाई दर काफी कम थी। जनवरी में यह 2.74% के स्तर पर थी, जो जून तक बढ़ते हुए 4.38% पर पहुंच गई है। पिछले महीने यानी अप्रैल के मुकाबले मई में खुदरा महंगाई में 0.45% की बढ़ोतरी दर्ज की गई है।
महंगाई बढ़ने की बड़ी वजह खाने-पीने की चीजों के दामों का बढ़ना है। फूड इन्फ्लेशन मई में बढ़कर 5.32% पर पहुंच गई। मई में यह आंकड़ा 4.38% था।
आलू और अदरक महंगे हुए, सोने-चांदी के गहने सस्ते
| सामान | मई में महंगाई दर | जून में महंगाई दर |
| आलू | -23.71 | -20.34 |
| टमाटर | 48.43 | 31.92 |
| अदरक | 32.50 | 50.41 |
| जीरा | -4.59 | -3.75 |
| सोना/हीरा/प्लैटिनम के गहने | 40.91 | 36.82 |
| चांदी के गहने | 155.25 | 133.21 |
इस साल रिटेल महंगाई का हाल
| महीना | महंगाई दर |
| जनवरी | 2.74% |
| फरवरी | 3.21% |
| मार्च | 3.40% |
| अप्रैल | 3.48% |
| मई | 3.93% |
| जून | 4.38% |
महंगाई कैसे बढ़ती-घटती है?
महंगाई का बढ़ना-घटना प्रोडक्ट की डिमांड-सप्लाई पर निर्भर करता है। अगर लोगों के पास पैसे ज्यादा होंगे तो वे ज्यादा चीजें खरीदेंगे। इससे चीजों की डिमांड बढ़ेगी और सप्लाई नहीं होने पर इनकी कीमत बढ़ेगी। वहीं अगर डिमांड कम होगी और सप्लाई ज्यादा तो महंगाई कम होगी।
4.38% महंगाई दर का क्या मतलब है?
1. तुलना पिछले साल से होती है (साल-दर-साल)
जब हम कहते हैं कि जून 2026 में महंगाई 4.38% है, तो इसका मतलब है कि हम इसकी तुलना जून 2025 से कर रहे हैं। यह पूरे एक साल का बदलाव है। 4.38% एक औसत नंबर है जिसे ‘कंज्यूमर प्राइस इंडेक्स’ कहते हैं। इसमें आपके जीवन की सैकड़ों चीजें शामिल हैं:
- किसी चीज के दाम बहुत ज्यादा बढ़े होंगे।
- किसी चीज के दाम घटे भी होंगे।
- जब इन सबको एक साथ मिलाया गया, तो औसतन खर्च 4.38% बढ़ गया।
2. ₹100 की चीज अब ₹104.38 की हो गई
इसका गणित बहुत सीधा है। अगर जून 2025 में आपने कोई सामान जैसे राशन ₹100 में खरीदा था, तो वही सामान मई 2026 में ₹104.38 का हो गया है।
