Donald Trump Presidency Plan Video; White House Speech

वॉशिंगटन डीसी19 मिनट पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने एक बार फिर से राष्ट्रपति बनने की इच्छा जताई है। व्हाइट हाउस में एक कार्यक्रम के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वे 8-9 साल बाद पद छोड़ेंगे।

यह सुनकर वहां मौजूद लोग हंसने लगे तो ट्रम्प ने कहा कि वह मजाक नहीं कर रहे। उन्हें काम करना पसंद है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि अभी उनके कार्यकाल की शुरुआत ही है और बहुत काम बाकी है।

ट्रम्प अगले महीने 80 साल के हो जाएंगे। उन्होंने अपनी उम्र को लेकर भी मजाक किया। उन्होंने कहा, “मैं बुजुर्ग नहीं हूं; मैं बुजुर्ग से कहीं ज्यादा जवान हूं। मुझे आज भी वैसा ही महसूस होता है जैसा 50 साल पहले होता था।”

इससे पहले भी ट्रम्प कई बार तीसरे टर्म का संकेत दे चुके हैं।

ट्रम्प को तीसरी बार राष्ट्रपति बनाने का बिल पेश, फिर आगे नहीं बढ़ पाया

इससे पहले एंडी ओगल्स ने 23 जनवरी 2025 को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में एक बिल पेश किया था। इस बिल का मकसद अमेरिकी संविधान में बदलाव करके डोनाल्ड ट्रम्प के लिए तीसरी बार राष्ट्रपति बनने का रास्ता खोलना था।

इस प्रस्ताव में कहा गया था कि जो व्यक्ति लगातार दो बार राष्ट्रपति नहीं रहा है, वह तीसरी बार चुनाव लड़ सके। चूंकि ट्रम्प 2020 में चुनाव हार गए थे, इसलिए इस बदलाव के बाद वे फिर से राष्ट्रपति बनने के लिए योग्य हो सकते थे।

हालांकि यह बिल आगे नहीं बढ़ पाया और हाउस में वोटिंग तक भी नहीं पहुंच सका। दरअसल, अमेरिका में संविधान बदलना बहुत मुश्किल होता है। इसके लिए हाउस और सीनेट दोनों में दो-तिहाई बहुमत चाहिए होता है। मौजूदा हालात में रिपब्लिकन पार्टी के पास इतना बहुमत नहीं है।

इसके अलावा, ऐसे बदलाव को लागू करने के लिए 50 में से कम से कम 38 राज्यों की मंजूरी भी जरूरी होती है। अभी कई राज्यों में विपक्षी डेमोक्रेट पार्टी की सरकार है, इसलिए इस तरह का प्रस्ताव पास होना बहुत मुश्किल माना जाता है।

73 साल पहले 2 बार राष्ट्रपति बनने का नियम बना

अमेरिका में पहले किसी व्यक्ति के सिर्फ 2 ही बार राष्ट्रपति बनने को लेकर कोई प्रावधान नहीं था। 1951 में संविधान में 22 संशोधन किया गया। इसके तहत ये नियम बनाया गया कि अमेरिका में कोई शख्स सिर्फ 2 बार ही राष्ट्रपति बन सकता है।

दरअसल, अमेरिका के पहले राष्ट्रपति जॉर्ज वॉशिंगटन ने दो टर्म के बाद रिटायरमेंट ले लिया था। उसके बाद से राष्ट्रपति के दो टर्म से ज्यादा सेवाएं न देने का अनौपचारिक नियम ही बन गया। इसके बाद अमेरिका में यह प्रथा बन गई।

31 अमेरिकी राष्ट्रपतियों में से किसी भी राष्ट्रपति ने इस प्रथा को नहीं तोड़ा, लेकिन फ्रैंकलिन डी रूजवेल्ट के दौर में यह नियम टूट गया। वे 1933 से 1945 चार बार राष्ट्रपति चुनकर आए।

क्या ट्रम्प संविधान बदल सकते हैं?

ट्रम्प को तीसरी बार अमेरिकी राष्ट्रपति पद के लिए चुनाव के लिए उतरना है तो उन्हें अमेरिकी संविधान में बदलाव करना होगा, जो इतना आसान नहीं है। ट्रम्प को इसके लिए अमेरिकी सीनेट और हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव दोनों में दो-तिहाई बहुमत से एक बिल पास कराना होगा। ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास दोनों सदनों में इतने सदस्य नहीं हैं।

सीनेट में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के पास 100 में से 52 सीनेटर है। वहीं, हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव में 435 में से 220 सदस्य हैं। ये संविधान संशोधन के लिए आवश्यक दो तिहाई यानी 67% बहुमत से काफी कम है।

अगर ट्रम्प ये बहुमत हासिल कर लेते हैं तब भी उनके लि​​​​​​ए संविधान में संशोधन करना इतना आसान नहीं होगा। अमेरिकी कांग्रेस के दोनों सदनों से बिल पास होने के बाद इस संशोधन के लिए राज्यों से मंजूरी लेनी होती है।

इसके लिए तीन चौथाई राज्यों का बहुमत मिलन के बाद ही संविधान में संशोधन हो सकता है। यानी 50 अमेरिकी राज्यों में से अगर 38 संविधान में बदलाव के लिए राजी हो जाए तो ही नियम बदल सकते हैं।

पुतिन की स्ट्रैटजी अपना सकते हैं ट्रम्प

ट्रम्प खुद भी कई बार कह चुके हैं कि वो दो कार्यकाल के बाद भी सत्ता में बने रहना चाहते हैं। हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि अगर ट्रम्प को तीसरा कार्यकाल नहीं मिलता तो वे सत्ता में बने रहने के लिए दूसरे तरीके अपना सकते हैं।

हैमिल्टन कॉलेज के प्रोफेसर फिलिप क्लिंकनर ने मुताबिक ट्रम्प 2028 में उपराष्ट्रपति बन सकते हैं और जेडी वेंस या किसी और को नाममात्र का राष्ट्रपति बना सकते हैं। ऐसा ही कुछ पुतिन ने रूस में किया था। इसके अलावा वो अपने परिवार के किसी सदस्य को राष्ट्रपति बना सकते हैं, ताकि पर्दे के पीछे से सरकार पर उनका कंट्रोल बना रहे।

पुतिन 2000 से 2008 तक लगातार 2 बार रूस के राष्ट्रपति रह चुके थे। रूस के संविधान के मुताबिक वे लगातार तीसरी बार राष्ट्रपति नहीं बन सकते थे। ऐसे में उन्होंने अपने खास दिमित्री मेदवेदेव को राष्ट्रपति बना दिया था। इस दौरान पुतिन उपराष्ट्रपति के पद पर रहे थे।

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