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DDU में युवाओं को रोजगार के नए मौके देने के लिए ‘इंस्टीट्यूट ऑफ मीडिया, फिल्म एंड कम्युनिकेशन’ (IMFC) बनाने को हरी झंडी दे दी गई है। इसके साथ ही ‘इंस्टीट्यूट ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस’ की स्थापना की जाएगी। जहां इसी सेशन (2026-27) से बैचलर ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस (B.Lib.I.Sc.) और मास्टर ऑफ लाइब्रेरी एंड इन्फॉर्मेशन साइंस (M.Lib.I.Sc.) के कोर्स शुरू होंगे। इसके अलावा मनोविज्ञान विषय में अब ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन लेवल पर 4 साल का सेमेस्टर सिस्टम लागू किया जाएगा। साथ ही एक और बड़ा फैसला लिया गया है। जिसमें चार्टर्ड अकाउंटेंट की डिग्री को यूनिवर्सिटी की पोस्ट ग्रेजुएशन (एमकॉम/एमबीए) डिग्री के बराबर मान लिया गया है। इस फैसले के बाद देश के सभी सीए अब सीधे गोरखपुर यूनिवर्सिटी से पीएचडी (PhD) कर सकेंगे और उन्हें कॉमर्स विभाग में रिसर्च करने का मौका मिलेगा। फॉरेंसिक साइंस और बायोटेक्नोलॉजी की पढ़ाई भी
साइंस के छात्रों को नए मौके देने के लिए ‘इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस’ की स्थापना की जाएगी और एमएससी फॉरेंसिक साइंस का कोर्स शुरू होगा। साथ ही, नए सेशन से बीएससी बायोटेक्नोलॉजी को भी एक विषय के रूप में शामिल किया जाएगा। अब 4 नहीं 3 साल में करेंगे पार्ट- टाइम पीएचडी
रिसर्च करने वाले छात्रों के हित में फैसला लेते हुए यूनिवर्सिटी ने साल 2022-23 में रजिस्टर्ड पार्ट-टाइम पीएचडी छात्रों के लिए यूनिवर्सिटी में रहने की जरूरी समय सीमा (रेसिडेंशियल पीरियड) को 4 साल से घटाकर 3 साल कर दिया है। इससे नौकरीपेशा और पार्ट-टाइम पीएचडी कर रहे लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और वे अपना काम समय पर पूरा कर सकेंगे।
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DDU में खुलेंगे मीडिया, फिल्म और फॉरेंसिक साइंस इंस्टीट्यूट:CA की डिग्री के बाद सीधे कर सकेंगे PHD, रिसर्च करने का मौका मिलेगा