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इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने प्रदेश के वकीलों के लिए बीमा योजना और आर्थिक सहायता (डिस्ट्रेस मनी) बढ़ाने के मामले में राज्य सरकार के विधि विभाग से जवाब मांगा है। यह आदेश न्यायमूर्ति राजन रॉय और न्यायमूर्ति मंजीव शुक्ला की खंडपीठ ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद पारित किया। खंडपीठ ने इस मामले में स्वत: संज्ञान लेते हुए जनहित याचिका दर्ज की थी। सुनवाई के दौरान अवध बार एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने न्यायालय को बताया कि वकीलों को दी जाने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने का प्रस्ताव विचाराधीन है। एसोसिएशन ने यह भी जानकारी दी कि इस संबंध में वरिष्ठ अधिवक्ताओं से चर्चा के बाद एक विस्तृत प्रस्ताव न्यायालय में पेश किया जाएगा। वहीं, निजी वकीलों के लिए बीमा योजना लागू करने में आर्थिक अड़चनें सामने आई हैं। अवध बार एसोसिएशन ने बताया कि लगभग 14 हजार वकीलों का बीमा कराने पर प्रति वकील सालाना करीब 4,999 रुपये का प्रीमियम देना होगा। इस हिसाब से कुल खर्च लगभग 7 करोड़ रुपये बैठता है। एसोसिएशन ने स्पष्ट किया कि इतनी बड़ी राशि वहन करना उनके लिए संभव नहीं है। मामले की अगली सुनवाई 12 मई 2026 को निर्धारित की गई है।
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वकीलों के बीमा, आर्थिक सहायता पर सरकार से जवाब मांगा:इलाहाबाद हाईकोर्ट ने जनहित याचिका पर सुनवाई के बाद दिया आदेश