वाराणसी के उप सचिव साहब यादव पर बड़ा एक्शन:रुपये लेकर गलत तरीके से मार्कशीट में संशोधन करने के मामले में हुई कार्रवाई, DIOS आफिस भेजे गए


माध्यमिक शिक्षा परिषद के क्षेत्रीय कार्यालय वाराणसी में तैनात उप सचिव साहब सिंह यादव पर आखिरकार एक्शन हो गया। उन्हें इस पद से हटा कर अब DIOS आफिस में तैनात कर दिया गया है। वह अब सह जिला विद्यालय निरीक्षक बना दिए गए हैं। इनके स्थान पर सह जिला विद्यालय निरीक्षक रहे राजन सिंह को उप सचिव बनाया गया है। दरअसल, उन पर 40 हजार रुपये लेकर गलत तरीके से एक छात्र की मार्कशीट में जन्मतिथि में संशोधन करने के गंभीर आरोप लगे थे। “दैनिक भास्कर एप” ने इस खबर को पिछले दिनों प्रमुखता से प्रकाशित किया था। इस मामले में उप सचिव साहब सिंह यादव व पांच बाबुओं की संलिप्तता पायी गई थी। प्रभारी दिनेश सिंह ने इस मामले में इन सभी से स्पष्टीकरण भी मांगा था लेकिन इन लोगों ने जवाब नहीं दिया था। नियम यह है कि तीन साल से ज्यादा पहले की मार्कशीट में जन्मतिथि में संशोधन करने का अधिकार प्रयागराज स्थित यूपी बोर्ड के सचिव को है लेकिन इसके बावजूद इन लोगों की मिलीभगत से उप सचिव के हस्ताक्षर से दूसरे दिन ही संशोधन करके मार्कशीट छात्र को दे दी गई थी। छात्र की शिकायत के बाद हुआ था खुलासा गोरखपुर निवासी अंकित कुमार ने अपनी जन्मतिथि संशोधन को लेकर वाराणसी क्षेत्रीय कार्यालय में आवेदन किया था। अंकित मौजूदा समय में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय का छात्र है। उसने यूपी बोर्ड, प्रयागराज में भेजे गए शिकायती पत्र में बताया कि उसने वर्ष 2014 में नीना थापा इंटर कालेज गोरखपुर से हाईस्कूल पास किया था। सनद में जन्मतिथि में संशोधन कराना था। इसके लिए कई बार क्षेत्रीय कार्यलय का चक्कर लगाता रहा। अंकित ने बताया, “जब मैं एक दिन कार्यालय गया तो बाबू राहुल चौरसिया ने कहा, 40 हजार रुपये दे दो, तुम्हारा काम करा दूंगा, क्योंकि ये काम प्रयागराज और फिर दिल्ली से होता है। हमें, सनद की जरूरत थी। राहुल ने 40 हजार रुपये लिए और दूसरे दिन जन्मतिथि में संशोधन करके दे दिया। एक ही दिन में मार्कशीट मिलने पर अंकित को आशंका हुई तो उसने इसकी शिकायत बोर्ड सचिव से की है।”
जांच में मिली थी कई विसंगतियां, मांगा गया था स्पष्टीकरण जांच में पाया गया कि कार्यालय अभिलेखों में उपलब्ध टिप्पणियों और आदेशों के अनुपालन में कई विसंगतियां हैं। पत्रावली में दर्ज टिप्पणियों के अनुसार, संबंधित प्रकरण में जन्मतिथि संशोधन के लिए आवश्यक दस्तावेजों और जांच आख्या को लेकर अलग-अलग स्तर पर विरोधाभास दिखाई दिया। कुछ आदेशों में वर्ष 1998 की जन्मतिथि संशोधित करने का निर्देश अंकित किया गया, जबकि पूर्व अभिलेखों में अलग तिथि दर्ज थी। मामले में यह भी उल्लेख किया गया कि संबंधित पत्रावली में जांच समिति की रिपोर्ट संलग्न नहीं पाई गई, जबकि आदेश उसी जांच आख्या के आधार पर पारित किए जाने का उल्लेख किया गया है। इसके अतिरिक्त, ओवरराइटिंग और हस्ताक्षरों को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि कुछ अधिकारियों के हस्ताक्षर उपलब्ध नहीं हैं, जबकि उनके नाम से आदेश अंकित किए गए हैं। प्रभारी अपर सचिव दिनेश सिंह की ओर से जो स्पष्टीकरण जारी किया गया था उसमें कहा गया था कि संबंधित निर्धारित तिथि तक अपना लिखित स्पष्टीकरण और साक्ष्य उपलब्ध कराएं। यह भी कहा गया था कि समयसीमा के भीतर जवाब न मिलने पर यह माना जाएगा कि संबंधित पक्ष को अपने बचाव में कुछ नहीं कहना है, जिसके बाद विभागीय नियमों के तहत अग्रिम कार्रवाई की जाएगी। 40 हजार रुपये लेने वाले बाबू का भी बदला गया पटल शनिवार देर शाम क्षेत्रीय कार्यालय के 15 बाबुओं के कार्य पटल में बदल दिए गए हैं। इसमें वरिष्ठ सहायक राहुल चौरसिया का भी नाम शामिल है जिसने 40 हजार रुपये लेकर छात्र मार्कशीट में जन्मतिथि में संशोधन कराया था। जिनके पटल बदले गए हैं उसमें गोपाल दास खरवार, प्रदीप कुमार, राम सूरत सोनकर, विजय कुमार पटेल, अजय प्रकाश पाल, अभिषेक यादव, सुनील कुमार मौर्या, नीरज कुमार वर्मा, अभिषेक श्रीवास्तव, मनोज कुमार सरोज, सुरेश कुमार-1, भोज प्रताप पाल, राहुल चौरसिया, मनोज कुमार मिश्र व सूरज त्रिपाठी का नाम शामिल है।

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