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इलाहाबाद हाई कोर्ट ने अर्बन लैंड सीलिंग के एक पुराने मामले में 24 साल की देरी से दायर याचिका को खारिज कर दिया।
कोर्ट ने कहा कि मूल भू-स्वामी को नोटिस की जानकारी थी, उसने कभी आपत्ति नहीं की। न्यायमूर्ति सरल श्रीवास्तव व न्यायमूर्ति सुधांशु चौहान की खंडपीठ ने टुनटुन की याचिका पर यह आदेश दिया। प्रयागराज का मामला जानिये प्रयागराज के ग्राम छतनाग, झूंसी, तहसील फूलपुर* की 3,483 वर्ग मीटर जमीन का मामला है।याची का कहना था कि उसके दादा मदन पुत्र महादेव मूल भू-स्वामी थे, जिन्होंने सीलिंग रिटर्न दाखिल किया था। आरोप था कि धारा 8(3) का नोटिस रजिस्टर्ड डाक से नहीं दिया गया, 25.मार्च 1983 को धारा 8(4) में जमीन को सरप्लस घोषित कर दिया गया, धारा 10(5) का नोटिस 22.फरवरी.1996 को तामील नहीं किया गया और धारा 10(6) की कार्रवाई कभी नहीं हुई। याची ने कहा कि वह कब्जे में है और धारा 4 के तहत अपील कार्यवाही समाप्त हो गई है। राज्य ने विरोध किया वहीं राज्य पक्ष ने रिकॉर्ड पेश कर बताया कि धारा 8(3) का नोटिस मूल भू-स्वामी मदन लाल को 31.अगस्त .1979 को तामील हुआ, 18 अक्टूबर 1984 को धारा 9 का फाइनल स्टेटमेंट भोला नाथ को मिला, गजट में धारा 10(1) व 10(3) की अधिसूचना 01.मार्च .1986 व 09.दिसंबर .1995 को प्रकाशित हुई, धारा 10(5) का नोटिस 22.फरवरी .1996 को जारी होकर 30.अप्रैल 1996 को मदन के हस्ताक्षर के साथ तामील हुआ। कोई विरोध न होने पर 30 दिन बाद कब्जा स्वतः राज्य को हस्तांतरित हो गया और राजस्व रिकॉर्ड में राज्य का नाम दर्ज हो गया। 11.दिसंबर 1996 के शासनादेश से कब्जा प्रयागराज विकास प्राधिकरण को दे दिया गया। कोर्ट ने कहा कि रिकॉर्ड से स्पष्ट है कि नोटिस तामील हुए थे और मूल भू-स्वामी को पूरी जानकारी थी। कहा लंबी अवधि बाद केवल प्रक्रियात्मक कमी के आधार पर कार्यवाही रद्द नहीं की जा सकती। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए याची को अपने कथित कब्जे के आधार पर दीवानी वाद दायर करने की छूट दी है।
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24 साल बाद अर्बन लैंड सीलिंग का दायर केस खारिज:प्रयागराज का मामला, हाईकोर्ट ने कहा दीवानी वाद में जाएं