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वाराणसी के जगतपुर स्नातकोत्तर महाविद्यालय में महान आलोचक एवं साहित्यकार आचार्य रामचंद्र शुक्ल पर केंद्रित “आचार्य रामचंद्र शुक्ल और लोकमंगल की अवधारणा” विषयक एक राष्ट्रीय संगोष्ठी का भव्य आयोजन किया गया। डॉ. रत्नाकर दुबे द्वारा कार्यक्रम के शुभारंभ के पश्चात, बीज वक्तव्य में प्रो. एन. एन. राय ने आचार्य शुक्ल के व्यक्तित्व और एक विचारक के रूप में उनके निर्माण की प्रक्रिया पर विस्तार से प्रकाश डाला। विशिष्ट वक्ता प्रो. रमेश चंद ने आचार्य शुक्ल के चिंतन को गहराई से समझाया, जबकि मुख्य वक्ता प्रो. कामिल ने पाश्चात्य विचारक आई. ए. रिचर्ड्स और आचार्य शुक्ल के आलोचनात्मक चिंतन का एक शानदार तुलनात्मक अध्ययन प्रस्तुत किया। अध्यक्षीय संबोधन में प्राचार्य प्रो. अनिल प्रताप सिंह ने आचार्य शुक्ल के जन्मस्थान बस्ती से जुड़ी अपनी विशिष्ट स्मृतियां साझा कीं। इससे पूर्व हिन्दी विभागाध्यक्ष डॉ. नन्दलाल शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत किया। कार्यक्रम का सारांश डॉ. संजय उपाध्याय ने प्रस्तुत किया, जबकि संचालन डॉ. सारिका सिंह और धन्यवाद ज्ञापन डॉ. विनय प्रकाश शर्मा द्वारा किया गया।
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आचार्य रामचंद्र शुक्ल पर संगोष्ठी:जगतपुर पीजी कॉलेज में साहित्यकारों ने रखे विचार