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शिक्षा व्यवस्था में एमसीक्यू, एआई और कोचिंग के बढ़ते दखल पर दिल्ली विश्वविद्यालय की शिक्षाविद् प्रो. अनीता रामपाल ने सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि शिक्षा सामाजिक प्रक्रिया है, जिसमें शिक्षक और विद्यार्थी मिलकर ज्ञान अर्जित करते हैं। सबसे घातक एमसीक्यू प्रणाली है, जिसमें मूल्यांकन मशीन कर रही है। भविष्य के शिक्षक को मशीन नहीं बनने देना है। निशातगंज स्थित कैफी आजमी अकादमी सभागार, में रविवार को जन विचार मंच की ओर से विचारक अशोक गर्ग और केके चतुर्वेदी की स्मृति में ‘हमारी शिक्षा : हम सभी का भविष्य’ विषय पर संगोष्ठी हुई। भोपाल की नीना ने फैज की नज्म ‘हम देखेंगे’ से कार्यक्रम की शुरुआत की। नीट, पेपर लीक और कोचिंग पर उठाए सवाल प्रो. रामपाल ने नीट परीक्षा, पेपर लीक, एआई और कोचिंग उद्योग के बढ़ते दखल पर चिंता जताई। उन्होंने कहा कि आज बच्चे पढ़ना, लिखना और सोचना नहीं कर पा रहे हैं। वस्तुनिष्ठ सवाल सीमित होने चाहिए। विद्यार्थियों द्वारा परीक्षाओं के विरोध को उन्होंने उचित बताया। कहा कि ह्यूमन प्रोफेशनल्स को मशीन से रिप्लेस नहीं किया जा सकता। उन्होंने स्वीडन, नॉर्वे और फिनलैंड के शिक्षा मॉडल का उदाहरण देते हुए कहा कि भविष्य की शिक्षा में आलोचनात्मक सोच और दृष्टि विकसित करना जरूरी है। उनके मुताबिक स्वीडन ने डिजिटलाइजेशन कम कर पाठ्य पुस्तकों की ओर वापसी शुरू की है। शिक्षा व्यवस्था शीर्षासन की तरह पलट गई अध्यक्षीय वक्तव्य में लखनऊ विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. रूपरेखा वर्मा ने कहा कि शिक्षा में लंबे समय से गड़बड़ियां चली आ रही हैं। आज शिक्षा व्यवस्था शीर्षासन की तरह पूरी तरह पलट गई है। उन्होंने विश्वविद्यालयों में प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस रखने की भी आलोचना की। विज्ञान को पौराणिक संदर्भों से जोड़ना तर्कसंगत नहीं विषय प्रवर्तन करते हुए मानवशास्त्री प्रो. नदीम हसनैन ने कहा कि शिक्षा मानवता को आजाद करने और ताकत देने वाली होनी चाहिए। इसमें विद्यार्थी और शिक्षक सह-विवेचक की भूमिका में हों। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालयों में शिक्षकों के चयन का तरीका बदला है और इसका असर प्राथमिक शिक्षा में भी दिखाई दे रहा है। विज्ञान को सीधे पौराणिक संदर्भों से जोड़ना तर्कसंगत नहीं है।
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शिक्षाविद् ने AI और कोचिंग पर उठाए सवाल:शिक्षा व्यवस्था में बढ़ते दखल पर DU की प्रो. अनीता रामपाल ने चिंता जताई