झांसी के मल्टीप्लेक्स में गदा लेकर पहुंचे साधु-संत:भाजपा विधायक संग स्क्रीन के सामने किया हनुमान चालीसा का पाठ, फिर चलाई गई फिल्म 'हनुमान अंश'


झांसी में शनिवार को सौ से ज्यादा साधु-संत हाथ में गदा और शरीर पर भगवा वस्त्र धारण कर बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा के साथ खिलौना मल्टीप्लेक्स के थिएटर में पहुंचे। यहां उन्होंने सिल्वर स्क्रीन के सामने भगवान हनुमान की तस्वीर की आरती उतारी, फिर हनुमान चालीसा का पाठ किया। इसके बाद सभी संतों ने थियेटर में रिलीज हुई निर्माता-निर्देशक विशाल चतुर्वेदी की फिल्म ‘हनुमान अंश’ देखी। बाहर संतों की भीड़ देखकर लोगों में बनी रही असमंजस की स्थिति फिल्म देखने के लिए जब बड़ी संख्या में साधु-संत मल्टीप्लेक्स के बाहर जुटे तो आने-जाने वाले लोग उन्हें देखकर रुक गए। संतों के हाथ में गदा और भगवा वस्त्र देखकर तरह-तरह की चर्चाएं होने लगीं। कुछ लोगों को लगा कि फिल्म में धार्मिक भावनाओं से जुड़ी कोई आपत्तिजनक बात होने के कारण संत विरोध करने पहुंचे हैं। लेकिन जब संत एक-एक कर सिनेमाघर के अंदर जाने लगे तो पूरी स्थिति स्पष्ट हो गई। संत बोले- जीवन में पहली बार सिनेमाघर देखा फिल्म देखने पहुंचे स्वामी आत्माराम परमहंस महाराज काफी उत्साहित नजर आए। उन्होंने कहा कि उन्होंने आज से पहले कभी सिनेमाघर नहीं देखा और न ही यहां आए हैं। बबीना विधायक ने भगवान हनुमान का अंश कहे जाने वाले नीम करौली महाराज पर आधारित फिल्म देखने के लिए आमंत्रित किया, इसलिए मना नहीं कर सके। उन्होंने कहा कि फिल्म को शास्त्रों की कसौटी पर भी समझेंगे और देखेंगे कि फिल्म बनाने वालों ने इसमें किन तथ्यों को शामिल किया है। संत बोले- विचारों को शुद्ध करने वाली फिल्म बनती रहनी चाहिए ओरछा से आए संतों ने कहा कि उन्होंने भी जीवन में कभी सिनेमाघर नहीं देखा था। धार्मिक फिल्म देखने के लिए वे पहली बार थिएटर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा कि समाज के विचारों को शुद्ध करने वाली ऐसी फिल्में बनती रहनी चाहिए। इससे देश का युवा आध्यात्म से जुड़ सकेगा और देश व समाज के विकास में योगदान देगा। संतों ने कहा कि फिल्म में नीम करौली वाले महाराज का पूरा जीवन शानदार तरीके से दिखाया गया है। विधायक बोले- देश को टुकड़ों में बांटने वाली फिल्में नहीं बननी चाहिए बबीना विधायक राजीव सिंह पारीछा ने कहा कि जिस महात्मा के जीवन पर यह फिल्म आधारित है, उन्हें भगवान हनुमान का अवतार कहा जाता है। उन्होंने कहा कि जो भी भारत माता की जय बोलता है, उसे यह फिल्म देखनी चाहिए। विधायक ने कहा कि अगर मारधाड़ और देश को टुकड़ों में बांटने वाली फिल्में बन सकती हैं तो ऐसी धार्मिक फिल्में क्यों नहीं बननी चाहिए। उन्होंने कहा कि संतों को फिल्म दिखाने के लिए इसलिए आमंत्रित किया गया है, ताकि उनका आशीर्वाद मिल सके और उनके माध्यम से देश की संस्कृति को बढ़ावा दिया जा सके।

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