लखनऊ में ओबीसी आरक्षण के समान वितरण पर संगोष्ठी:रोहिणी आयोग की सिफारिशें लागू करने और अति पिछड़ों को प्रतिनिधित्व देने की मांग


लखनऊ के हजरतगंज स्थित प्रेस क्लब में लोकमाता रानी अहिल्याबाई होल्कर विचार मंच की ओर से प्रेस वार्ता एवं संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इसमें ओबीसी के भीतर आरक्षण के समान वितरण, अति पिछड़े वर्गों के प्रतिनिधित्व और सामाजिक न्याय से जुड़े मुद्दों पर चर्चा हुई। वक्ताओं ने कहा कि आरक्षण का लाभ समाज के उन वर्गों तक भी पहुंचना चाहिए, जो लंबे समय से इससे वंचित हैं। इसके लिए ओबीसी आरक्षण में पारदर्शी उप-वर्गीकरण जरूरी है। बैठक में संविधान के अनुच्छेद 340 के तहत गठित रोहिणी आयोग की सिफारिशों को लागू करने की मांग की गई। वक्ताओं ने कहा कि ओबीसी के भीतर आरक्षण के लाभ का समान वितरण नहीं हो पा रहा है। बड़ी संख्या में ओबीसी समुदायों को सरकारी नौकरियों और शैक्षणिक संस्थानों में आरक्षण का पर्याप्त लाभ नहीं मिला है। सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने की मांग प्रतिनिधियों ने जस्टिस राघवेंद्र सिंह की अध्यक्षता में गठित सामाजिक न्याय समिति की रिपोर्ट लागू करने और पिछड़े वर्गों का बैकलॉग कोटा जल्द भरने की मांग की। साथ ही अति पिछड़ी जातियों को सरकारी आयोगों, निगमों, विभागों, बोर्डों और समितियों में 40 प्रतिशत समुचित प्रतिनिधित्व देने की मांग उठाई गई। पंचायत और नगर निकाय चुनाव में आरक्षण मिले वक्ताओं ने बिहार की तर्ज पर उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में अनुच्छेद 243(D)(6) और नगर निकाय चुनावों में अनुच्छेद 243(T)(6) के तहत आरक्षण व्यवस्था लागू करने की मांग रखी। उन्होंने कहा कि स्थानीय निकायों में भी अति पिछड़े वर्गों को उनकी आबादी और सामाजिक स्थिति के अनुरूप प्रतिनिधित्व मिलना चाहिए। वक्ताओं ने कहा कि सामाजिक न्याय तभी सार्थक होगा, जब आरक्षण का लाभ अंतिम पायदान तक पहुंचे। इसके लिए जातिवार आंकड़ों, वैज्ञानिक अध्ययन और पारदर्शी उप-वर्गीकरण की जरूरत है। बैठक में आर.डी. पाल, राजेश कुमार पाल, संतोष पाल, कैलाश नाथ निषाद, रामाधार पाल, आर.जी. पाल, फूल चंद्र पाल, संजय पाल, अशोक कुमार, मुकेश निषाद, कप्तान सिंह पाल, रमेश पाल, अजय पाल, सतीश दीक्षित, हरबंश सिंह सहित कई सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे।

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