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मऊ जिले में एक कोर्ट ने हत्या के प्रयास के मामले में एक आरोपी को दोषी ठहराया है। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश दीपनारायण तिवारी ने दोषी को सात साल के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई। जुर्माना न भरने पर उसे छह महीने की अतिरिक्त जेल काटनी होगी। कोर्ट ने यह भी आदेश दिया कि जुर्माना जमा होने पर वादी के पिता और दोषी के बेटे को संयुक्त रूप से मुआवजा दिया जाएगा। यह घटना 24 मई 2015 को शहर कोतवाली क्षेत्र में हुई थी। इस संबंध में शहर कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया गया था। शिकायत में बताया गया था कि 24 मई 2015 को आरोपी अपने पिता से झगड़ा कर वादी के पिता की चाय की दुकान पर आया था। इस दौरान आरोपी वीरेंद्र ने अपने बेटे विशाल का गला रेतने की कोशिश की। जब वादी के पिता ने बीच-बचाव किया, तो आरोपी ने उन्हें जान से मारने की नीयत से हमला कर दिया था। वादी की शिकायत के आधार पर शहर कोतवाली में एफआईआर दर्ज की गई थी। मामले की जांच के बाद कोर्ट में चार्जशीट पेश की गई। अभियोजन पक्ष की ओर से एडीजीसी फौजदारी अनिल कुमार पाण्डेय ने 9 गवाहों के बयान दर्ज कराए। जनपद एवं सत्र न्यायाधीश दीपनारायण तिवारी ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों को देखने के बाद आरोपी वीरेंद्र, निवासी ग्राम खालसा कानून गोयाक चक, थाना कोतवाली को दोषी ठहराया। कोर्ट ने दोषी को हत्या के प्रयास के मामले में सात साल के सश्रम कारावास और पांच हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई।
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मऊ में हत्या के प्रयास के दोषी को 7 साल:2015 में बेटे का गला रेता, बचाने आए पिता पर भी किया था हमला