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इटावा के विधि छात्र प्रबल प्रताप सिंह ने जेल से रिहा होने के बाद गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे पहली बार मीडिया से बातचीत की। उन्होंने न्यायिक व्यवस्था में बदलाव और न्यायिक भ्रष्टाचार खत्म करने की मांग को लेकर राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था परिवर्तन यात्रा निकालने की घोषणा की। यात्रा 4 सितंबर 2026 को प्रयागराज से शुरू होकर करीब 1000 किलोमीटर की दूरी तय करेगी और 4 नवंबर को नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में समाप्त होगी। सुप्रीम कोर्ट में प्रदर्शन के बाद गए थे जेल प्रबल प्रताप करीब एक महीने पहले सुप्रीम कोर्ट में साइबर फ्रॉड से जुड़े मुद्दे को लेकर चर्चा में आए थे। आरोप है कि अदालत की कार्यवाही के दौरान उन्होंने तत्कालीन सीजेआई को अपशब्द कहे और पेपर फेंका था। मामले में उनके खिलाफ कार्रवाई की गई और उन्हें जेल भेज दिया गया था। जेल से बाहर आने के बाद उन्होंने अपने उस कदम और आगे की रणनीति को लेकर मीडिया से बातचीत की। भगत सिंह से जोड़ा अपना विरोध प्रबल प्रताप ने कहा कि उन्होंने अपनी बात देशभर तक पहुंचाने के उद्देश्य से सुप्रीम कोर्ट में विरोध दर्ज कराया था। उन्होंने अपने कदम की तुलना भगत सिंह के विरोध से करते हुए कहा कि जिस तरह भगत सिंह ने अपनी आवाज देश तक पहुंचाने के लिए संसद में प्रतीकात्मक विरोध किया था। इसी तरह वह भी न्याय व्यवस्था से जुड़े मुद्दों को देशभर के लोगों तक पहुंचाना चाहते थे। हालांकि, उनके इस कदम के बाद एक सिपाही की ओर से मुकदमा दर्ज कराया गया और उन्हें जेल जाना पड़ा। 4 सितंबर से शुरू होगी पदयात्रा अब प्रबल प्रताप राष्ट्रीय न्याय व्यवस्था परिवर्तन यात्रा के जरिए न्यायिक व्यवस्था में बदलाव की मांग को लेकर लोगों के बीच जाएंगे। उनके अनुसार, यात्रा 4 सितंबर को प्रयागराज के चंद्रशेखर आजाद पार्क से शुरू होगी। करीब 60 दिनों तक चलने वाली पदयात्रा का समापन 4 नवंबर को दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में प्रस्तावित है। इन जिलों से होकर गुजरेगी यात्रा यात्रा प्रयागराज से शुरू होकर प्रतापगढ़, रायबरेली, लखनऊ, हरदोई, शाहजहांपुर, बरेली, रामपुर, मुरादाबाद, अमरोहा, बिजनौर, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर से होकर आगे बढ़ेगी। इसके बाद यात्रा हरियाणा में प्रवेश करेगी। कुरुक्षेत्र, करनाल, पानीपत और सोनीपत होते हुए पदयात्रा दिल्ली पहुंचेगी। आयोजकों के दस्तावेज में यात्रा की कुल दूरी करीब 1000 किलोमीटर बताई गई है। अदालतों और शिक्षण संस्थानों में करेंगे संपर्क यात्रा के दौरान रास्ते में आने वाले जिलों के जिला एवं सत्र न्यायालयों, तहसीलों और गांवों में लोगों से संपर्क किया जाएगा। विश्वविद्यालयों और डिग्री कॉलेजों सहित उच्च शिक्षण संस्थानों में भी अधिवक्ताओं, कानून के छात्रों और आम लोगों के बीच न्याय व्यवस्था से जुड़े मुद्दे उठाए जाएंगे। आयोजकों का कहना है कि अभियान के जरिए इन मुद्दों पर जनसमर्थन जुटाने का प्रयास किया जाएगा। न्याय व्यवस्था में बदलाव प्रमुख मांग यात्रा के दस्तावेज में न्यायपालिका में लोकतांत्रिक व्यवस्था स्थापित करने, न्यायपालिका को संसद के बराबर ताकतवर बनाने और न्यायिक भ्रष्टाचार खत्म करने को प्रमुख उद्देश्य बताया गया है। यात्रा के दौरान इन मुद्दों को लेकर जनजागरण अभियान चलाने की बात कही गई है। आयोजकों ने सभी कार्यक्रम शांतिपूर्ण और कानूनसम्मत तरीके से आयोजित करने का दावा किया है। चार चरणों में पूरी होगी यात्रा यात्रा को चार चरणों में बांटा गया है। पहले चरण में प्रयागराज से लखनऊ, दूसरे चरण में लखनऊ से शाहजहांपुर होते हुए सहारनपुर, तीसरे चरण में हरियाणा के विभिन्न जिलों से होते हुए दिल्ली और अंतिम चरण में नई दिल्ली के फिरोजशाह कोटला मैदान में समापन प्रस्तावित है। प्रबल प्रताप सिंह ने कहा कि उनका उद्देश्य न्याय व्यवस्था से जुड़े अपने विचारों को ज्यादा से ज्यादा लोगों तक पहुंचाना है।
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जेल से रिहा हुए CJI को गाली देने वाले प्रबल:4 सितंबर से प्रयागराज से निकालेंगे 1000 किमी की यात्रा, 4 नवंबर को दिल्ली में समापन